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अल्बानीज: 'उनके कहने पर 40 हजार लोगों ने मेरे लिए लगाए नारे', प्रधानमंत्री मोदी के मुरीद हुए ऑस्ट्रेलियाई पीएम

Sat, 26 Sep 2026 07:21 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज ने पीएम मोदी के ऊर्जा विस्तार की तारीफ की। जानिए कैसे भारत ने 41 देशों से कच्चा तेल और एलपीजी आयात कर वैश्विक संकट के बीच स्थिर आपूर्ति बनाए रखी। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
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पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने की तारीफ। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के कारण जब होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही बाधित है और पाकिस्तान व बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, तब ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भारत में बिजली की पहुंच बढ़ाने के लिए खुलकर प्रशंसा की है। 'एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट' के कार्यक्रम में अल्बानीज ने कहा कि मानव इतिहास के किसी भी दशक, क्षेत्र या देश की तुलना में पीएम मोदी के कार्यकाल में सबसे अधिक लोगों को ऊर्जा तक पहुंच प्रदान की गई है।

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एक हल्के-फुल्के पल का जिक्र करते हुए अल्बानीज ने यह भी कहा, "मोदी के किसी इवेंट में गए बिना आपको उनके प्रभाव के बारे में पता नहीं चल सकता। आपने कुछ नहीं देखा"। उन्होंने कहा कि मेलबर्न स्टेडियम में 40,000 ऑस्ट्रेलियाइयों ने उनके (अल्बानीज) नाम के नारे केवल इसलिए लगाए क्योंकि पीएम मोदी ने उनसे ऐसा करने का अनुरोध किया था।

अल्बानीज ने भारत में ऊर्जा के विस्तार पर क्या कहा?

'एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट' के एक वैश्विक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में ऊर्जा पहुंच का अभूतपूर्व विस्तार किया है। अल्बानीज ने अपने संबोधन में कहा, "पीएम मोदी को इसका श्रेय दिया जाना चाहिए कि मानव इतिहास में किसी भी दशक, किसी भी क्षेत्र या देश की तुलना में उनके कार्यकाल में भारत में सबसे अधिक लोगों को ऊर्जा तक पहुंच दी गई है"। अल्बानीज ने दोनों देशों के प्रगाढ़ होते कूटनीतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए यह भी जोड़ा कि पीएम मोदी एक ऐसे वैश्विक नेता हैं, जिनके साथ ऑस्ट्रेलिया ने बेहद मजबूत और घनिष्ठ संबंध विकसित किए हैं।

भारत कैसे स्थिर आपूर्ति बनाए रखने में सफल रहा?

वर्तमान में जब होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है और पाकिस्तान व बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश गंभीर ऊर्जा किल्लत से जूझ रहे हैं, तब भारत में ईंधन की आपूर्ति काफी हद तक निर्बाध रही है और कीमतों में भी बेहद सीमित वृद्धि दर्ज की गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, भारत 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं, अंतरराष्ट्रीय बाजार की वर्तमान स्थिति और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विविध स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद जारी रखे हुए है।

भारत ने अपने ऊर्जा आयात स्रोत कैसे बढाएं है?

भारत की ऊर्जा स्थिरता का मुख्य आधार आयात स्रोतों में रणनीतिक विविधता लाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में जानकारी दी थी कि पहले भारत केवल 27 देशों से ऊर्जा का आयात करता था, लेकिन अब इस संख्या को बढ़ाकर 41 देश कर दिया गया है। भारत वर्तमान में 41 अलग-अलग देशों से कच्चा तेल, एलपीजी और पीएनजी प्राप्त कर रहा है। सरकार द्वारा पश्चिम एशिया संघर्ष के अर्थव्यवस्था, सप्लाई चेन और जरूरी सामानों पर पड़ने वाले असर की व्यापक समीक्षा के बाद यह रणनीति अपनाई गई ताकि देश भर में पेट्रोल और डीजल की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

भारत के रणनीतिक कदम का क्या प्रभाव पड़ा है?

ऊर्जा आयात के स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक फैलाने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुस्तरीय सुरक्षा प्राप्त हुई है:

  • सप्लाई चेन सुरक्षा: आयात आधार व्यापक होने से किसी एक विशिष्ट समुद्री मार्ग या क्षेत्र में तनाव पैदा होने पर भी भारत की घरेलू आपूर्ति शृंखला प्रभावित नहीं होती।
  • मुद्रास्फीति पर अंकुश: ईंधन दरों में सीमित बढ़ोतरी रहने के कारण परिवहन और माल ढुलाई की लागत स्थिर बनी हुई है, जिससे व्यापक उपभोक्ता महंगाई दर पर दबाव कम रहता है।
  • कॉरपोरेट व एमएसएमई सेक्टर को मजबूती: विनिर्माण, औद्योगिक उत्पादन और छोटे-बड़े उद्योगों को बिना किसी बाधा के ऊर्जा की उपलब्धता बनी रहने से व्यावसायिक गतिविधियों में निरंतरता कायम है।

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारत की बहु-पक्षीय कूटनीति और आयात विविधीकरण रणनीति ने देश की आर्थिक संप्रभुता को मजबूत आधार प्रदान किया है। ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व से मिली यह वैश्विक स्वीकार्यता यह साबित करती है कि भारत ने न केवल अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के पुनर्गठन में भी एक जिम्मेदार और निर्णायक शक्ति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है।

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