केंद्रीय बजट से पहले उद्योग संगठन एसोचैम ने स्टील उद्योग के डीकार्बोनाइजेशन को तेज करने के लिए सरकार से नीतिगत समर्थन की अपील की है। संगठन ने हाइड्रोजन आधारित डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) के लिए इंसेंटिव, रियायती ग्रीन फाइनेंस, वेस्ट-हीट रिकवरी सिस्टम और रिन्यूएबल कैप्टिव पावर प्लांट्स को बढ़ावा देने का सुझाव दिया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं। इससे पहले जारी प्री-बजट सिफारिशों में एसोचैम ने कहा कि डीकार्बोनाइजेशन, जहां एक बड़ी चुनौती है, वहीं यह वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत के लिए बड़ा अवसर भी बन सकता है।
संगठन ने स्क्रैप कलेक्शन और रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहन देने पर भी जोर दिया है। एसोचैम के मुताबिक, घरेलू रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और स्किलिंग बढ़ाने से आयात पर निर्भरता कम होगी।
हालांकि, संगठन ने स्टील सेक्टर की चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक होने और 8 से 9 फीसदी की मजबूत ग्रोथ के बावजूद, सेक्टर को ऊंची इनपुट लागत, रुपये की कमजोरी और कोकिंग कोल के भारी आयात पर निर्भरता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि देश में इसके खनन योग्य भंडार बेहद सीमित हैं।