चीन और अमेरिका ने अपने लंबे समय से चल रहे ट्रेड वॉर (व्यापार युद्ध) को 90 दिनों के लिए रोकने का फैसला लिया है। इस खबर से दुनियाभर के शेयर बाजारों, खासकर एशियाई बाजारों में मंगलवार को तेजी देखने को मिली। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह शांति ज्यादा दिन नहीं टिक सकती क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां अचानक बदल सकती हैं। दोनों देशों ने साझा बयान में कहा कि चीन से आने वाले अमेरिकी सामानों पर टैरिफ (शुल्क) को अधिकतम 145% से घटाकर 30% और अमेरिका से चीन भेजे जाने वाले सामानों पर टैरिफ को 125% से घटाकर 10% किया जाएगा। यह 90 दिन की रोक जिनेवा में हुई सफल बातचीत का नतीजा है।
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बाजारों में मिली राहत
एसपीआई एसेट मैनेजमेंट के स्टीफन इनिस ने कहा, 'यह कूटनीतिक कदम पहले से तयशुदा था, लेकिन इसके संकेत अच्छे हैं। इससे बाजार को यह भरोसा मिला है कि भारी शुल्कों से अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है, जिसे अब खुद अमेरिकी सरकार भी मान रही है।'
जापान, कोरिया और चीन के बाजारों का हाल
जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.8% उछलकर 38,326.37 पर पहुंच गया। टोयोटा मोटर के शेयर 3.7% और सुजुकी मोटर के शेयर 4.6% ऊपर बंद हुए। वहीं निसान मोटर 3.2% बढ़ा, हालांकि खबर आई कि वह 10,000 और कर्मचारियों की छंटनी करेगा। इस कड़ी में दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 0.2% की बढ़त के साथ 2,612.30 पर बंद हुआ। जबकि, हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स, जो सोमवार को 3% चढ़ा था, मंगलवार को 0.7% गिरकर 23,374.06 पर आ गया। तकनीकी शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। इधर चीन का शंघाई कंपोजिट सूचकांक 0.2% ऊपर रहा, जबकि ताइवान का ताइएक्स 1.9% उछला। उधर ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटीज एक्सचेंज लिमिटेड 200 इंडेक्स 0.6% चढ़कर 8,281.40 पर पहुंच गया।
टैरिफ कम होने की खबर से कच्चे तेल की मांग बढ़ने की उम्मीद बनी, लेकिन मंगलवार को इसके दामों में थोड़ी गिरावट आई है। बता दें कि, अमेरिकी कच्चा तेल 6 सेंट गिरकर $61.89 प्रति बैरल पर रहा। ब्रेंट क्रूड 8 सेंट गिरकर $64.88 प्रति बैरल पर आ गया।
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डॉलर में मजबूती और ब्याज दरों की उम्मीद
अमेरिकी डॉलर यूरो, जापानी येन और स्विस फ्रैंक जैसी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ। मंगलवार को डॉलर 147.98 येन पर कारोबार कर रहा था (सोमवार को 148.47 येन था)। यूरो के मुकाबले डॉलर $1.1101 तक पहुंच गया, जो पहले $1.088 था। इससे संकेत मिला कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें उतनी नहीं घटाएगा जितनी पहले सोची जा रही थीं।
अर्थव्यवस्था को फायदा लेकिन चुनौतियां बरकरार
यूबीएस के मुख्य अर्थशास्त्री जोनाथन पिंगल का कहना है कि यह डील अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर में 0.4% की बढ़ोतरी कर सकती है। इस साल की पहली तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था 0.3% की दर से घटी थी। हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच बाकी मसलों पर सहमति बनाना अभी बाकी है। साथ ही, एशिया के कई देश अब भी अपनी-अपनी ट्रेड डील के लिए बातचीत नहीं कर पाए हैं।