Andhra Pradesh Chit Fund Case: अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) एन संजय ने संवाददाताओं से कहा कि समूह ने आरबीआई की अनुमति के बिना जमा राशि जुटाई और मीडिया कारोबारी रामोजी राव की ओर से गठित कंपनी ने जमाकर्ताओं से एकत्र की गई राशि को कथित तौर पर जोखिम भरे शेयर बाजार में 'डायवर्ट' कर दिया।
आंध्र प्रदेश सीआईडी ने ईडी और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों से चिट फंड कानून के कथित उल्लंघन के आरोपों के लिए मार्गदर्शी चिट फंड की जांच करने को कहा है।
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अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) एन संजय ने यहां संवाददाताओं से कहा कि समूह ने आरबीआई की अनुमति के बिना जमा राशि जुटाई और मीडिया कारोबारी रामोजी राव की ओर से गठित कंपनी ने जमाकर्ताओं से एकत्र की गई राशि को कथित तौर पर जोखिम भरे शेयर बाजार में 'डायवर्ट' कर दिया।
क्या है आंध्र प्रदेश का चिट फंड घोटाला?
उन्होंने कहा कि सीआईडी को संदेह है कि चिट फंड कंपनी के पास धन जमा करने वाले लोग 'आम लोग या काल्पनिक' हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई शिकायतकर्ता नहीं है, लेकिन राज्य सरकार इन कथित उल्लंघनों पर मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती।
उन्होंने आरोप लगाया कि चिट फंड कंपनी चिट फंड अधिनियम के तहत नहीं बल्कि कंपनी अधिनियम के तहत अपनी बैलेंस शीट दाखिल कर रही है और राज्य सीआईडी इसे एक अनियमितता मानती है क्योंकि सार्वजनिक धन को निजी संस्थाओं की ओर से संभाला जा रहा है।
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एडीजी ने कहा कि उन्होंने इन आरोपों की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और एसएफआईओ को पत्र लिखा है और उनसे मुलाकात की है। सीआईडी ने समूह के खिलाफ सात प्राथमिकी दर्ज की हैं और रामोजी राव और उनकी बहू शैलजा किरण सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। वे अब जमानत पर बाहर हैं।