अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारत-अमेरिका के दशकों के रिश्तों पर प्रकाश डालते हुए एक अहम प्रस्ताव पेश किया गया है। वाशिंगटन डीसी कार्यालय ने कहा कि इस उपाय में 21वीं सदी की चुनौतियों, आतंकवाद से निपटने और साइबर खतरों से लेकर उभरती प्रौद्योगिकियों तक का सामना करने के लिए अमेरिका और भारत के बीच निरंतर सहयोग का आह्वान किया गया है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में मंगलवार को एक अहम द्विदलीय प्रस्ताव पेश किया गया। डेमोक्रेट सांसद और सबसे लंबे समय से सेवाकाल निभा रहे भारतीय-अमेरिकी सदस्य अमी बेरा व रिपब्लिकन सांसद जो विल्सन ने यह प्रस्ताव संयुक्त रूप से रखा।
प्रस्ताव में दोनों देशों के सहयोग को रेखांकित किया गया है
वाशिंगटन डीसी कार्यालय के अनुसार प्रस्ताव में भारत-अमेरिका के बीच वर्षों में मजबूत हुई रणनीतिक साझेदारी को आधिकारिक पहचान दी गई है। इसमें रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार, आतंकवाद निरोध और शिक्षा सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीत दशकों से बढ़ते सहयोग को रेखांकित करता है। प्रस्ताव यह भी रेखांकित करता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, आर्थिक प्रगति और मुक्त व खुले क्षेत्र को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
तीन दशक से अधिक समय से दोनों देशों के रिश्तें रहे हैं मजबूत
प्रस्ताव में कहा गया है कि तीन दशकों से अधिक समय से, राष्ट्रपति क्लिंटन, बुश, ओबामा, ट्रम्प और बिडेन के प्रशासन के तहत अमेरिका की नीति भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की रही है। इसमें क्षेत्रीय स्थिरता, लोकतांत्रिक शासन, आर्थिक विकास और साझा क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के लिए इसके महत्व को मान्यता दी गई है।
21वीं सदी की चुनौतियों का समाना करने के लिए किया गया आह्वान
वाशिंगटन डीसी कार्यालय ने कहा कि इस उपाय में 21वीं सदी की चुनौतियों, आतंकवाद से निपटने और साइबर खतरों से लेकर उभरती प्रौद्योगिकियों तक का सामना करने के लिए अमेरिका और भारत के बीच निरंतर सहयोग का आह्वान किया गया है। यह दोनों देशों के बीच स्थायी लोगों के बीच संबंधों को भी मान्यता देता है, जो भारतीय और अमेरिकी प्रवासियों द्वारा लगातार मजबूत हो रहे हैं। इस प्रस्ताव को कुल 24 मूल सह-प्रायोजकों के साथ मजबूत द्विदलीय समर्थन प्राप्त हुआ है।