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बजट से उम्मीदें: टैरिफ संकट के बीच अर्थव्यवस्था की रफ्तार, निर्यात और रोजगार बढ़ाने वाला होगा बजट

Thu, 22 Jan 2026 04:44 AM IST
लव गौर अमर उजाला ब्यूरो

सार

अर्थशास्त्री संदीप वेम्पति ने बताया कि एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में विकसित भारत लक्ष्य को साधने की झलक दिखेगी। वेम्पति का मानना है कि सरकार इस लक्ष्य के लिए बजट में व्यापार सुगमता, निर्यात, रोजगार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, पर्यावरण और शहरी-ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी।
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बजट 2026 से पहले प्री-बजट बैठक (फाइल फोटो) - फोटो : x.com/@FinMinIndia
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विस्तार
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टैरिफ संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एक फरवरी, 2026 को पेश होने वाला आम बजट भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ाने वाला हो सकता है। साथ ही, यह मोदी सरकार की सतत विकास रणनीति के अनुरूप होगा, जिसमें 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साधने की झलक भी दिखाई देगी। 
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अर्थशास्त्री संदीप वेम्पति का मानना है कि सरकार इस लक्ष्य के लिए बजट में व्यापार सुगमता, निर्यात, रोजगार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, पर्यावरण और शहरी-ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी।

वेम्पति ने कहा, सतत विकास रणनीति ने 2014 से अर्थव्यवस्था को गति प्रदान की है। यह आत्मनिर्भरता के सिद्धांत से निर्देशित है। इसके 5 मूलभूत स्तंभ हैं, जो पांच रणनीतिक मोर्चों से संचालित है। ये पांच मूलभूत स्तंभ हैं...नागरिकों एवं संप्रभुता की सुरक्षा। स्वास्थ्य-शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर निरंतर ध्यान। मजबूत, स्थिर और लचीली वृहद अर्थव्यवस्था का निर्माण। नेतृत्व की स्थिरता, निरंतरता और हर मोर्चे पर प्रभावी गवर्नेंस।
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इन क्षेत्रों पर रहेगा जोर
अर्थशास्त्री ने कहा, जो पांच रणनीतिक क्षेत्र हैं, उनमें समावेशिता और संतुलित क्षेत्रीय विकास के माध्यम से आर्थिक वृद्धि का विस्तार। निरंतर सुधार। घरेलू विनिर्माण को सुदृढ़ करना। अनुसंधान एवं विकास, नवाचार व उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना और उभरते क्षेत्रों को समर्थन देना है। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर बजट में जोर दिया जा सकता है।

56 लाख करोड़ हो सकता है बजट का आकार
बजट 2026 का आकार 55 लाख करोड़ से 56 लाख करोड़ के बीच रहने की संभावना है। 2025-26 में नॉमिनल जीडीपी में 10 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है और 2026-27 में इसके लगभग 390 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।

बढ़ सकता है पूंजीगत खर्च
खर्च की गुणवत्ता में सुधार जारी रहेगा और पूंजीगत व्यय 12.25 लाख करोड़ से 12.5 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने की संभावना है। पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता जारी रहने की संभावना है। इसके लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे।

नियामक व वैधानिक स्वीकृतियां बड़ी बाधाएं
उच्च वृद्धि दर हासिल करने में सबसे बड़ी बाधाएं नियामक और वैधानिक स्वीकृतियां व अनुपालन एवं निजी क्षेत्र की जोखिम से बचने की प्रवृत्ति हैं। व्यापार करने में आसानी सरकार की प्राथमिकता होगी। अब तक की कई पहलों को आगे बढ़ाते हुए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम के पुनर्गठन की घोषणा होने की संभावना है।

ये भी पढ़ें: आरबीआई बुलेटिन: भविष्य के लिए उम्मीद जगाती है जीडीपी की मौजूदा स्थिति, सुधारों से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था की गति

राष्ट्रीय औद्योगिक नीति की घोषणा
राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन के विस्तार या उन्नयन के रूप में स्पष्ट रूपरेखा व फोकस क्षेत्रों वाली राष्ट्रीय औद्योगिक नीति की घोषणा की जा सकती है। निर्यात के लिए मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।
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राष्ट्रीय डाटा सेंटर नीति की उम्मीद
राष्ट्रीय डाटा सेंटर नीति पेश किए जाने की उम्मीद है, जो विदेशी और घरेलू निवेश को आकर्षित करेगी। पिछड़े और आगे के संबंधों को बढ़ावा देगी व रोजगार और सेवा निर्यात को सृजित करेगी।
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