रूस के कच्चे तेल निर्यात में फिर से तेजी देखने को मिल रही है। इसमें चीन ने अहम भूमिका निभाई है। चीन ने अपनी खरीदारी बढ़ा दी है। यह उछाल ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी तेल आयात को लेकर भारत पर दंडात्मक शुल्क लगा दिया है। इसने दक्षिण एशियाई देश की ओर जाने वाले रूसी तेल के प्रवाह को प्रभावित किया है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ओर जाने वाले रूसी तेल का प्रवाह अगस्त 31 तक खत्म हुए चार हफ्तों में औसतन 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन से नीचे रहा। यह मार्च में दर्ज हालिया उच्चतम स्तर से करीब एक-तिहाई कम है। यहां तक कि अगर उन टैंकरों का पूरा तेल, जिनकी मंजिल अभी तय नहीं हुई है, भारत पहुंच भी जाए, तब भी यह प्रवाह मार्च के शिखर स्तर से लगभग 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन या 28% कम रहेगा।
वहीं, चीन जाने वाले कच्चे तेल की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह पांच महीने के उच्चमत स्तर 1.28 मिलयन बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गई है।
इस बीच रूसी बंदरगाहों से कुल साप्ताहिक कच्चे तेल की खेप 770,000 बैरल प्रतिदिन बढ़कर 3.49 मिलियन बैरल पर पहुंच गई। यह सात सप्ताह का उच्चतम स्तर है, जो पिछले सात दिनों के असामान्य रूप से निम्न स्तर से उबर रही है। ब्लूमबर्ग की संकलित टैंकर-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस उछाल ने चार सप्ताह के औसत कच्चे तेल की मात्रा को बढ़ा दिया है। इसमें 31 अगस्त तक की अवधि में समुद्री माल औसतन 3.15 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा।
रखरखाव कार्य के कारण रूस के पूर्वी तट पर स्थित सखालिन 2 परियोजना की चार हफ्ते की अनुपस्थिति के बाद शिपमेंट फिर से शुरू हो गया है। पश्चिम में, बाल्टिक बंदरगाह उस्त-लुगा की ओर प्रवाह आंशिक रूप से बहाल हो गया है। यह ड्रोन हमले में एक पंपिंग स्टेशन को हुए नुकसान के कारण बाधित हुआ था। अतिरिक्त मात्रा प्रिमोर्स्क की ओर मोड़ दी गई है।