उत्पादों की गुणवत्ता से समझौता न किया जाए
वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में बड़े निवेश और वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिससे अवसरों का बड़ा दायरा खुला है। ऐसे में उत्पादों की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अगर किसी एक क्षेत्र पर अधिकतम ऊर्जा, बुद्धिमत्ता और संसाधन केंद्रित करने हैं, तो वह गुणवत्ता होनी चाहिए। भारतीय उत्पाद न केवल अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरें, बल्कि उन्हें पीछे भी छोड़ें।
पीएम ने उद्योग जगत से क्या कहा?
उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि वे अन्य देशों की जरूरतों और वहां के उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं का गहन अध्ययन करें। उन आवश्यकताओं को समझकर उपयोगकर्ता-अनुकूल उत्पाद विकसित किए जाएं, तभी मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का पूरा लाभ उठाया जा सकेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के साथ विकास का राजमार्ग तैयार है और अब भारतीय उद्योग को इस पर तेज गति से आगे बढ़ना है।
मोदी ने सस्टेनेबिलिटी अपनाने पर क्यों दिया जोर?
प्रधानमंत्री ने कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन हो रहा है और अब बाजार केवल लागत नहीं, बल्कि सस्टेनेबिलिटी को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 'कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (CCUS) मिशन' इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत से अपील की कि वे सस्टेनेबिलिटी को अपनी मूल व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा बनाएं। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि जो उद्योग समय रहते स्वच्छ तकनीक में निवेश करेंगे, वे आने वाले वर्षों में नए वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच बना सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट ने इस दिशा में नई राह दिखाई है और उद्योग, निवेशक व विभिन्न संस्थानों को मिलकर इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कार्य करना चाहिए।