अमेरिका में मुद्रास्फीति मई महीने में पिछले साल के मुकाबले पांच फीसदी बढ़ गई है। जबकि पिछले महीने अप्रैल के मुकाबले महंगाई दर में 0.6 फीसदी की वृद्धि हुई है। मुद्रास्फीति में यह वृद्धि 2008 के बाद सर्वाधिक है। श्रम विभाग के आंकड़े के अनुसार मई में उपभोक्ता महंगाई दर में वृद्धि यह बताती है कि विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ रही है। कोविड-19 महामारी पर अंकुश के बाद तेजी से खुल रही अर्थव्यवस्था में लोग अधिक खरीदारी और यात्रा कर रहे हैं।
कल-पुर्जों की मांग में कमी
एक तरफ जहां उपभोक्ताओं की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ इस्पात से लेकर रसायन समेत अन्य कल-पुर्जों की कमी है। विनिर्मित उत्पादों से लेकर सेवाओं के क्षेत्र में मांग बढ़ रही है जिससे कीमतें बढ़ रही हैं।
मई में 0.7 फीसदी बढ़ी मुख्य मुद्रास्फीति
सरकार की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य मुद्रास्फीति (कोर इन्फ्लेशन) मई में 0.7 फीसदी बढ़ी जबकि पिछले 12 महीनों के मुकाबले यह 3.8 फीसदी अधिक है। मुख्य मुद्रास्फीति में अधिक उतार-चढ़ाव वाले ऊर्जा और खाद्य वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता।
कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही कंपनियां
अनाज बेचने वाली जनरल मिल्स से लेकर पेंट बनाने वाली कंपनी शेरविन-विलियम्स तक, कई कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं या ऐसा करने की योजना बना रही हैं। इसका कारण कच्चे माल के दाम में वृद्धि और कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए उनके वेतन में इजाफा किया जा रहा है।
भारत में सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंची थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति
भारत की बात करें, तो सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल और खनिज तेलों की कीमतों में वृद्धि के कारण थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति (WPI) अप्रैल 2021 में अब तक के उच्चतम स्तर पर, यानी 10.49 फीसदी पर पहुंच गई है। थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति मार्च में 7.39 फीसदी पर थी। फरवरी में थोक महंगाई दर 4.17 फीसदी थी। जनवरी के लिए, WPI मुद्रास्फीति दर 2.51 फीसदी थी।