ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन अब जलमार्गों के माध्यम से गंगा नदी से अपने सामान को ट्रासपोर्ट करेगी। इसके लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) और अमेजन सेलर सर्विसेज ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य गंगा नदी का उपयोग करके जलमार्गों के माध्यम से सामान की आवाजाही को बढ़ावा देना है।
पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल इस महत्वपूर्ण समझौते के साक्षी बने। इस अवसर पर सोनोवाल ने कहा कि ई-कॉमर्स कार्गो के साथ पहला जहाज जल्द ही पटना से कोलकाता के लिए रवाना किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य जल परिवहन की दक्षता और स्थिरता का लाभ उठाना है। साथ ही लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करना, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना है।
सोनोवाल ने आईडब्ल्यूएआई और अमेजन सेलर सर्विसेज के बीच करार को भारत में जलमार्गों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में जलमार्गों को परिवहन का एक व्यापक और लोकप्रिय साधन बनाने के लिए हमेशा विशेष ध्यान दिया गया है। पीएम मोदी के इस दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में सरकार अथक प्रयास कर रही है ताकि जलमार्गों का विकास सुनिश्चित किया जा सके। यह आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस सेवा की शुरुआत से कारीगरों, उद्यमियों और व्यापारियों को किफायती लागत पर अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े बाजार में आसानी से बेचने का अवसर मिलेगा।
शिपमेंट की परिवहन लागत घटेगी
इस समझौते से अमेजन ग्राहकों को ऑनलाइन ऑर्डर की तेज, लागत प्रभावी, टिकाऊ और अधिक विश्वसनीय डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए रेल, वायु, जल और सड़क सहित देश में परिवहन के सभी संभावित तरीकों का उपयोग करने में सक्षम होगी। इस साझेदारी से न सिर्फ अमेजन को शिपमेंट की परिवहन लागत कम करके लाभ होगा, बल्कि सभी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों का लाभ उठाने की नई संभावनाएं भी खुलेंगी।
पर्यावरण अनुकूल साधन है जल परिवहन
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, जल परिवहन की तुलना में रेल और सड़क परिवहन क्रमश: 18.5 प्रतिशत और 91.6 प्रतिशत अधिक ईंधन की खपत करते हैं। इसलिए जल परिवहन सबसे पर्यावरण अनुकूल साधन माना जाता है। देश में जल परिवहन में तेजी लाने के लिए सागरमाला परियोजना के तहत आरओआरओ/आरओपैक्स और अंतर्देशीय जल परिवहन से संबंधित 7,030 करोड़ रुपये की 113 परियोजनाएं शुरू की हैं। इन परियोजनाओं में से 1,100 करोड़ रुपये की 15 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 3,900 करोड़ रुपये की 32 परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है।