लखनऊ में आयोजित अमर उजाला संवाद 2026 के मंच पर मंगलवार को 'नया भारत, नया उत्तर प्रदेश' विषय पर एक विस्तृत परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण सत्र में उद्योग जगत के दिग्गजों और नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया और राज्य के आर्थिक विकास, आधारभूत ढांचे, क्विक कॉमर्स और स्वास्थ्य क्षेत्र में आ रहे बदलावों का डेटा-आधारित विश्लेषण पेश किया।
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और रियल एस्टेट परिदृश्य पर बात करते हुए एफिल ग्रुप के चेयरमैन एसके गर्ग ने राज्य की निवेश संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में अपार संभावनाएं मौजूद हैं और राज्य के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। इसके साथ ही नीतियों को लागू करने के लिए मंत्रियों का एक पूरा समूह (गैलेक्सी ऑफ मिनिस्टर) कार्यरत है। उन्होंने कहा कि रेरा के लागू होने के बाद से रियल एस्टेट सेक्टर की विश्वसनीयता में भारी वृद्धि हुई है और आगे चलकर इस क्षेत्र में और अधिक पारदर्शी व्यवस्था देखने को मिलेगी।
पूर्व आईएएस अधिकारी एससी नागपाल ने संवाद के मंच पर पहली बार सड़क सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे को शामिल करने के लिए आयोजकों की सराहना की। सड़क हादसों के गंभीर आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया:
नागपाल ने हादसों को कम करने के लिए दो प्रमुख कदम सुझाए। पहला, ओवर-स्पीडिंग रोकने के लिए पेट्रोलिंग गाड़ियों की ड्यूटी हर दिन अलग-अलग स्थानों पर लगाई जानी चाहिए। दूसरा, अवैध जगहों से होने वाली 'रॉन्ग साइड एंट्री' को प्राथमिकता के आधार पर रोकना जरूरी है। उनका मानना है कि हादसे के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले ही सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उपभोक्ता बाजार के बदलते स्वरूप पर जेप्टो के चीफ ग्रोथ ऑफिसर दिवेश साहनी ने अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जेप्टो का नेटवर्क अब 50 शहरों तक पहुंच चुका है। क्विक कॉमर्स के बिजनेस मॉडल को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि घनी आबादी वाले शहर इस सेवा के लिए सबसे अनुकूल होते हैं। कंपनी का मुख्य लक्ष्य अब अलग-अलग तरह के शहरों में ऐसी जगहों की पहचान कर अपनी पहुंच (रीच) को और अधिक विस्तार देना है।
स्वास्थ्य और बीमा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति पर उजाला सिग्नस हॉस्पिटल के एमडी और सीईओ नितिन नाग ने अपना दृष्टिकोण रखा। उन्होंने बीमा क्षेत्र में मौजूद वित्त के गैप (वित्तीय कमी) की बात स्वीकार की, लेकिन सरकारी योजनाओं के प्रभाव को भी स्पष्ट किया। नाग के अनुसार, आयुष्मान कार्ड योजना के जरिये देश के 55 करोड़ लोगों को बीमा कवर मिला है। इस कार्ड के माध्यम से अब कोई भी व्यक्ति किसी भी अस्पताल में जाकर अपना इलाज करा सकता है, जिससे आम परिवारों पर पड़ने वाले भारी आर्थिक बोझ में बड़ी कमी आई है।