औरतों को ऊंचा आसमान बहुत ज्यादा मेहनत करके मिलती है। 4% महिलाएं निफ्टी की कंपनियों में अहम पद पर है। 59% वर्किंग वुमन अपने वित्तीय निर्णय स्वयं नहीं लेती हैं। बनारसी बुनकर कभी भी महिलाएं नहीं होती हैं। आंकड़ों की इन सच्चाइयों के बीच अमर उजाला संवाद के 'आसमान छूने की बात' सेशन में कारोबार और टीवी जगत की सफल महिला शख्सियतों ने अपनी कहानियां कही। आइए पढ़ते हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश।
अनुराधा आचार्या, सीईओ, मैप माय जिनोम
मैप माय जिनोम की सीईओ अनुराधा आचार्या ने कहा कि पहले बस आईआईटी जाने की बात होती थी। उसके बाद यूएस जाने की होड़ लगती थी। मैं भी यूएस गई। यूएस जाकर मास्टर्स करके मैंने तय किया कि मुझे बिजनेस करना है। फिर बिजनेस स्कूल गई। फिर स्टार्टअप में काम शुरू किया। वह कंपनी बहुत कम समय में बड़ी हो गई। उसके बाद मैंने खुद का स्टार्टअप करने का निर्णय किया। उस समय जीनोम नई चीज थी। मैंने 2000 में पहली कंपनी शुरू की। उस समय भारत में ऐसी कंपनी नहीं थी। लेकिन पांच साल के अंदर मुझे एक ऐसा मौका मिला कि मुझे जर्मनी की एक कंपनी ने मुझे खुद को खरीदने का ऑफर मिला। फिर उसके बाद हमनें जर्मनी, नीदरलैंड और अमेरिका में कंपनियां खरीदी। दस साल पहले हमने तय किया जन्म पत्री देखते हैं। जीनोमिक होते हैं उसकी एक जिनोपत्री बनाएं। इसे आप ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं।
जीनोम सिक्वेसिंग से आप बीमारियों का पता कर सकते हैं। उनके उपचार के बारे में पता कर सकते हैं। कौन सा खाना आपके लिए सही है यह सारी चीजें पता कर सकते हैं। परिवार में सपार्ट सिस्टम जरूरी है। परिवार में लोग एक दूसरे की मदद करते रहते हैं। महिलाओं में कॉन्फिडेंस की कमी है। उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाकर उनमें कॉन्फिडेंस लाया जा सकता है। महिलाएं और पुरुषों दोनों में बदलाव की जरूरत है। दफ्तर में महिलाएं पुरुष की तुलना में कम काम कर रही हैं ऐसी मान्यताओं से जुड़े सवाल पर अनुराधा ने कहा कि ऐसी लोगों की भावना होती है पर यह सही नहीं है। हमारे ऑफिस में कोई ऐसा नहीं कह सकता है। ऐसा लोगों के लिए कहना आसान है पर यह सही नहीं है।
गीतिका गंजू धर, टीवी शख्सियत
मैंने ग्रेजुएशन बिजनेस मैनेजमेंट में किया था। फिल्ममेकर बनने का शौक था इसलिए मास कम्यूनिकेशन किया। मेरे पिता आर्मी ऑफिसर थे। शुरुआत बहुत गलत तरीके से हुई। पहले काम से ही बहुत पैसा मिल गया। शुरुआत में माहौल महिलाओं के लिए बहुत अलग था। मुझे इंडस्ट्री में एडजस्ट होने में वक्त लगा। बेटी होने के बाद ब्रेक लिया। फिर काम शुरू किया। पर तब चीजें आसान नहीं थीं। लोगों ने कॉल का जवाब देना बंद कर दिया। दोस्तों ने कहा लाइव इंडस्ट्री के लिहाज से वेट हो गया है। कैसे काम करोगी। उस वक्त मैंने फैसला किया। हम सबके अंदर दुर्गा विराजमान हैं। मैं ही तय करूंगी की कि मैं कब रिटायर होऊंगी। मैंने ज्यादा मेहनत किया। तीन-चार साल बहुत बड़ी मेहनत करनी पड़ी। वो नेटवर्क नहीं कर रही है। लोगों को हेल्प करती है। धीरे-धीरे करके यह सब होने लगा। मैंने अमिताभ और पीएम ऑफिस के लिए काम किया। कंट्री के दिग्गज लोग ऐसी महिला पर विश्वास कर रहे हैं जो आउटडेटेड हो गई है तो जरूर उसमें कोई बात होगी। जब तक आप काम करना चाहें तब तक काम कर सकती हैं।
मैं काम इसलिए नहीं करती हूं कि प्रसिद्धि हो। मैं इस लिए काम करती हूं कि किसी को इससे प्रेरणा मिले। बच्चे ही पहली प्रायॉरिटी होंगी। मैं शॉर्टकट नहीं लूंगी। मैं बतौर करियर नया करियर शुरू करने जा रही हूं। मुझे बहुत ही पियोरिटी से जर्नी तय करनी थी। सपोर्ट सिस्टम मांगने में कोई झिझक नहीं रहनी चाहिए। सभी को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। हेल्प मांगनी चाहिए और हम सबको एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। मेरा यह मानना है कि एक महिला जिस तरह से खुद को पेश करना चाहती है यह उसकी च्वाइस होनी चाहिए। पर अगर यह केवल आदमी को देखते हुए ऐसा कर रही है तो यह गलत है। यह महिला की मर्जी होनी चाहिए यह मजबूरी नहीं होनी चाहिए। सासों को अपनी बहू की मदद करनी चाहिए। उन्हें एक महिला के तौर अपनी बहू की मदद करनी चाहिए। मैंने जितना भी पैसा आज तक कमाया है मैंने उसे बहुत सिरियसली लिया है। आपके परिवार में जो पैसा आ रहा है उसकी इज्जत करना बहुत जरूरी है। ऐसे में आप अपने पैसे को मैनेज करना समझे। जमा पैसे को भी काम कराएं। यूएन का एक आंकड़ा है जिस स्पीड से हम लैंगिक समानता लाने की कोशिश कर रहे हैं अगर वही गति रही तो लैंगिक समानता लाने में 250 साल लग जाएंगे। मेरे गुरु कहते हैं हर किसी से आप दिल से बात करो, सच्चाई से बात करो तो कोई ऐसी चीज नहीं है जिसका हल नहीं हो।