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RBI: एल्गोरिदम के आधार पर निर्णय लेने को बढ़ावा देने से वित्तीय व्यवस्था पर बढ़ेगा संकट, बोले आरबीआई डीजी

Wed, 15 Oct 2025 03:17 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रिजर्व बैंक के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि डिजिटल इनोवेशन भुगतान से परे जाकर समावेशन का दायरा बढ़ा रहा है। भुगतान के अलावे भी इसका लोगों फायदा पहुंचा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स अब माइक्रो बीमा और पेंशन से जुड़े उत्पाद भी ग्राहकों को तेजी से मुहैया कराने लगे हैं। हालांकि इसके कुछ नकारात्मक पक्ष भी हैं। उन्होंने आगे क्या कहा, आइए जानें। 
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भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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ए़ल्गोरिदम के आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया और सेवाओं के कुछ ही प्लेटफॉर्म्स तक सीमित रहने को अगर अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो यह पूरी वित्तीय व्यवस्था को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि ये पारंपरिक खतरे नहीं हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर स्वानीनाथन जे ने बुधवार को यह बात कही। 
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रिजर्व बैंक के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि डिजिटल इनोवेशन भुगतान से परे जाकर समावेशन का दायरा बढ़ा रहा है। भुगतान के अलावे भी इसका लोगों फायदा पहुंचा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स अब माइक्रो बीमा और पेंशन से जुड़े उत्पाद भी ग्राहकों को तेजी से मुहैया कराने लगे हैं। इससे कम आमदनी वाले परिवारों को अपना वित्तीय लचीलापन मजबूत करने में मदद मिली है। 

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने 6 अक्तूबर 2025 को 'डिजिटल नवाचार के माध्यम से वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाना' विषय पर विश्व बचत और खुदरा बैंकिंग संस्थान (डब्ल्यूएसबीआई) की ओर से एसबीआई में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, "देश के बाहर यूपीआई की सुविधा मिलने से बाहर से पैसा भेजना आसान हुआ है। धन पहले की तुलना में तेज, सस्ता और अधिक सहज हुआ है। इससे औपचारिक चैनलों में विश्वास मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा, "रिजर्व बैंक में हम ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं जहां नवाचार जिम्मेदारीपूर्वक फल-फूल सके।"
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डिप्टी गवर्नर ने कहा कि फिनटेक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और एम्बेडेड फाइनेंस मॉडल के तेजी से बढ़ने से वित्तीय प्रणाली की सीमाओं का विस्तार हुआ है और इससे नए प्रकार के जोखिम पैदा हुए हैं। स्वामीनाथन ने कहा कि यदि ऐसे जोखिमों को अनियंत्रित छोड़ दिया जाए तो वे परेशानी का सबब बन सकते हैं। 
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