देश शनिवार को राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा दिवस (नेशनल रिन्यूएबल एनर्जी डे) मना रहा है। 1947 में जब देश आजाद हुआ था, उस वक्त सिर्फ 1362 मेगावाट बिजली तैयार होती थी। मार्च 2020 तक देश में 3 लाख 70 हजार 106 मेगावाट बिजली तैयार होती है। ट्रांसमिशन लाइन की लंबाई 1 करोड़ 34 लाख 40 हजार 258 सर्किट किमी है। आज देश में 1208 किलोवाट (सालाना) प्रति व्यक्ति बिजली की खपत है। 5 लाख 97 हजार 464 गांव तक बिजली पहुंच चुकी है। आजादी के समय 1362 गांव में बिजली पहुंची थी।
अमर उजाला से चर्चा में ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञ, लेखक और वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मिश्रा कहते हैं, भारत विश्व में चौथा सबसे बड़ा अक्षय ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) उत्पादक देश है। 2021 में ही हमने अपनी कुल बिजली उत्पादन का 40 फीसदी गैर-जीवाश्म ईंधन से करने में कामयाबी हासिल की है। भविष्य में ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को 2040 तक 8.6 खरब डॉलर के निवेश की जरूरत पड़ेगी। फिलहाल भारत सौर, पवन और हाइड्रोजन एनर्जी पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। सौर ऊर्जा उत्पादन में हम विश्व में पांचवें और पवन चक्कियों से बिजली पैदा करने में चौथे स्थान पर हैं।
मिश्रा कहते हैं कि अक्षय ऊर्जा ईंधन, परिवहन और औद्योगिक जरूरतों के लिए ऊर्जा की मांग को पूरा करने में सहायक होगी। इसके लिए हमें सिर्फ ग्रीन हाइड्रोजन से लेकर वेस्ट टू एनर्जी प्रोग्राम पर फोकस करना होगा। दरअसल कृषि प्रधान देश के रूप में भारत के पास ऑर्गेनिक वेस्ट की शक्ल में बड़ा फीडस्टॉक (कच्चा माल) मौजूद है। यदि हम पराली और दूसरे एग्री वेस्ट से बिजली और ईंधन तैयार करने लग जाते हैं तो पूरा ऊर्जा परिदृश्य बदल जाएगा। इसके लिए हमें कंप्रेस्ड बायोगैस आधारित परियोजनाओं से जुड़ी तकनीक और निवेश ग्राम पंचायत स्तर तक लेकर जाना होगा। वेस्ट टू एनर्जी कार्यक्रमों की उपयोगिता विश्व बैंक की उस रिपोर्ट से लगाई जा सकती है जिसमें कहा गया है कि 2030 तक भारत में 387.8 मिलियन टन वेस्ट सृजित होगा। इसमें सबसे बड़ा अनुपात एग्रीकल्चर वेस्ट का है। पशु धन की इस ताकत को यदि हम ईंधन विकसित करने में लगा सके, तो किसानों की आय बढ़ाने के साथ ऊर्जा का लोकतांत्रिक वितरण सुनिश्चित होगा। इसके लिए हमें गांव तक वेस्ट रीसाइक्लिंग, वेस्ट ट्रीटमेंट, गैसीफिकेशन, पैरालिसिस (ताप अपघटन) पर आधारित कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट का नेटवर्क खड़ा करना होगा।
दरअसल केंद्र सरकार का सबसे अहम जोर सौर ऊर्जा पर है। सौर ऊर्जा परियोजनाओं को अब केंद्र सरकार व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर लेकर जा रही है। इसके लिए रूफटॉप स्कीम शुरू की गई है। इसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति घर या संस्थान पर सोलर प्लांट लगा सकता है। खास बात यह है कि इससे तैयार होने वाली सौर बिजली को वह राज्य और स्वतंत्र डिस्कॉम को बेच भी सकता है। इसके लिए आप www.solarrooftop.gov.in पर अपना पंजीयन करा सकते हैं।