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Plane Crash: रनवे पर होता यह सिस्टम, तो नहीं जाती अजित पवार की जान; जानें कंपनी क्या बोली, जानकार क्या कह रहे

Wed, 28 Jan 2026 07:41 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अजित पवार की मौत और विमान हादसा के बारे में एक्सपर्ट्स का दावा है कि अगर बारामती एयरपोर्ट पर 'इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम' (आईएलएस) होता तो बच सकती थी जान। जानिए कैसे कम विजिबिलिटी और लैंडिंग की दूसरी कोशिश बनी हादसे की वजह।
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अजीत पवार - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे ने देश की विमानन सुरक्षा और एयरपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच और विशेषज्ञों के विश्लेषण से यह बात सामने आ रही है कि अगर बारामती एयरपोर्ट पर एक खास तकनीक मौजूद होती, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। दूसरी ओर, उड़ान का संचालन करने वाली कंपनी ने भी अपना पक्ष रखा है। हादसाग्रस्त विमान वीएसआर वेंचर्स नामक कंपनी की थी।

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कंपनी के मालिक वीके सिंह ने कहा पायलट को शायद रनवे दिखाई नहीं दिया और उसने मिस्ड अप्रोच का सहारा लिया जो एक मानकीकृत प्रक्रिया है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि दुर्घटनाग्रस्त विमान का रखरखाव बहुत अच्छी तरह से किया गया है। इसके पायलट कैप्टन सुमित कपूर, एक बहुत ही अनुभवी पायलट थे, जिन्होंने 16,000 उड़ान घंटे पूरे कर लिए थे। लीयरजेट 45 विमान में सवार सभी पांचों लोगों की दुर्घटना में मौत हो गई।

इस हादसे से जुड़े प्रमुख फैक्ट्स और एक्सपर्ट्स की राय यहां दी गई है

1. 'इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम' (आईएलएस) की कमी खली 
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, बारामती एयरपोर्ट के रनवे पर 'इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम' (आईएलएस) मौजूद नहीं था। रिटायर्ड पायलट एहसान खालिद ने बताया कि अगर रनवे पर आईएलएस लगा होता, तो कम दृश्यता के बावजूद पायलट को लैंडिंग में सटीक गाइडेंस मिल जाती और यह दुर्घटना नहीं होती। आईएलएस एक ऐसा रेडियो नेविगेशन सिस्टम है जो पायलटों को तब भी सुरक्षित लैंडिंग में मदद करता है जब उन्हें रनवे ठीक से दिखाई न दे रहा हो।

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2. पायलट्स की आंखों के भरोसे थी लैंडिंग 
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसे के वक्त विजिबिलिटी 'मार्जिनल' थी, यानी न तो बहुत साफ और न ही बहुत खराब। चूंकि वहां आईएलएस नहीं था, इसलिए पायलट को पूरी तरह से अपनी आंखों और बाहरी संकेतों के भरोसे ही नेविगेट करना पड़ रहा था। कम विजिबिलिटी में बिना इंस्ट्रूमेंट की मदद के लैंडिंग करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है, और एक्सपर्ट्स का मानना है कि यही इस क्रैश की एक बड़ी वजह हो सकती है।

3. दूसरी कोशिश बनी जानलेवा 
आंकड़ों से पता चलता है कि विमान ने लैंडिंग की पहली कोशिश को रद्द कर दिया था और 'गो-राउंड' लिया था। यानी, पायलट को पहली बार में सुरक्षित लैंडिंग का मौका नहीं मिला। इसके बाद, जब विमान ने दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश की, तब वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया।



4. पायलट की गलती या तकनीकी खराबी? 
विमान को उड़ा रहे कैप्टन सुमित कपूर एक बेहद अनुभवी पायलट थे, जिनके पास 15,000 घंटे से ज्यादा का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था। हालांकि पूर्व में उनके खिलाफ कुछ शिकायतें भी आई थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ मौसम या विजिबिलिटी ही कारण नहीं हो सकती। यह भी संभव है कि खराब मौसम के साथ-साथ विमान में अचानक कोई तकनीकी खराबी आ गई हो, जिसने हालात को बेकाबू कर दिया।
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5. ब्लैक बॉक्स खोलेगा राज 
फिलहाल, डीजीसीए और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने जांच शुरू कर दी है। एक्सपर्ट संजय लाजर का कहना है कि अब 'ब्लैक बॉक्स' और 'कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर' ही यह बता पाएंगे कि आखिरी पलों में क्या हुआ था। उन्होंने घटनास्थल पर सबूतों को सुरक्षित रखने की भी चेतावनी दी है ताकि जांच सही दिशा में हो सके।

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