एयरटेल के संस्थापक सुनील मित्तल ने सरकार की तारीफ करते हुए दावा किया है कि उनकी खुद की कंपनी के 100 अरब डॉलर समेत भारतीय कंपनियों का भारी मूल्यांकन एक बहुत मजबूत नेता की अगुवाई में स्थिर और ठोस अर्थव्यवस्था का परिणाम है। मित्तल ने गुरुवार को प्रकाशित इकनॉमिक टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में एक 'प्रेरणादायक' बैठक में अपनी सरकार को किसी कॉरपोरेट का पक्ष नहीं लेने का स्पष्ट संदेश दिया था, जो भारती एयरटेल के लिए महत्वपूर्ण क्षण था। इससे नई कंपनी रिलायंस जियो से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच एयरटेल को आगे बढ़ने में मदद मिली।
मित्तल ने कहा कि वह सितंबर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे, जब प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि उनकी सरकार पारदर्शिता के साथ काम करेगी, किसी के साथ एकतरफा नहीं जाएगी और देश के लिए जो अच्छा होगा वही किया जाएगा।
मित्तल ने कहा कि इस तरह की निश्चितता के साथ भारती एयरटेल जैसी कंपनियां बाजार में इसका मुकाबला कर सकती हैं। मित्तल ने कहा, "सरकार कुछ लोगों का पक्ष ले रही है, मेरे हिसाब से ऐसा कहना पूरी तरह से गलत है।" उन्होंने कहा, "इस देश में पैसा आ रहा है, बहुत सारी पूंजी आ रही है, शेयर बाजार बढ़ रहा है। ये बड़े मूल्यांकन एक बहुत ही मजबूत नेता की अगुवाई में एक स्थिर, ठोस और कार्यात्मक अर्थव्यवस्था के कारण हासिल किए गए हैं।
मित्तल के कारोबारी प्रतिद्वंद्वी अरबपति मुकेश अंबानी की जियो ने 2016 में मुफ्त वॉयस और डेटा सेवाओं के साथ दूरसंचार बाजार में उथल-पुथल मचा दी, जिससे यह एयरटेल को पछाड़कर देश की नंबर 1 दूरसंचार कंपनी बन गई। बाजार में जारी उठापटक से जूझ रही एयरटेल का उस समय मानना था कि दूरसंचार नियामक के कुछ फैसलों का कंपनी पर प्रतिकूल असर पड़ा। सितंबर 2018 में, उन्होंने पीएम के साथ एक बैठक की मांग की, उस समय मित्तल जीएसएमए के अध्यक्ष थे, यह एक लॉबी समूह है जो मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटरों के हितों का प्रतिनिधित्व करता था। इसके अलावे मित्तल इंटरनेशनल चैंबर्स ऑफ कॉमर्स की अपनी अध्यक्षता पूरी कर चुके थे। उस क्षमता में भी वह कभी-कभी मोदी को डब्ल्यूटीओ, जी-20 और अन्य मुद्दों पर जानकारी (ब्रीफ) देते थे।
उन्होंने कहा, 'इसलिए मैंने उनसे भारतीय दूरसंचार उद्योग पर बात करने की अनुमति मांगी। मैंने उनसे कहा कि चीजें बहुत खराब चल रही हैं और स्थिति बहुत खतरनाक हो रही है।' मित्तल ने मुलाकात जियो द्वारा मुफ्त वॉयस और डेटा सेवाओं की पेशकश और कई ऐसे नियमों का जिक्र किया, जिन्हें वह एक तरफा महसूस करते थे। मोदी के साथ अपनी बैठक को याद करते हुए मित्तल ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा, "मैं बाजार में प्रतिस्पर्धा करूंगा, लेकिन मैं सरकार से नहीं लड़ सकता।"
मित्तल ने कहा, 'उन्होंने (प्रधानमंत्री) मुझसे कहा कि उनकी सरकार किसी भी तरफ एकतरफा रूप से नहीं झुकेगी। देश के लिए जो भी अच्छा होगा, किया जाएगा। आप बाजार में प्रतिस्पर्धा करिए। मेरा इस पर कोई विचार नहीं है। लेकिन सरकार की तरफ से आपको भरोसा दिलाया जा सकता है कि सरकार किसी का पक्ष नहीं लेगी।" मित्तल के अनुसार पीएम का यह करना उनके लिए "पर्याप्त" था। मित्तल ने कहका, "मैं उठा और उन्हें धन्यवाद दिया ... यह (एयरटेल के लिए) टर्निंग प्वाइंट था।"
मित्तल ने कहा कि उन्हें इस मुलाकात से एक अकथनीय ऊर्जा और प्रेरणा मिली। कभी-कभी आपको प्रेरणा की जरूरत होती है। मैं अपनी टीम के साथ ऐसा करता हूं। मुझे किसी से इसकी जरूरत थी। प्रधानमंत्री की ओर से एक बहुत मजबूत और विशेष संदेश आया। बाजार में लड़ो। यहां एक ऐसा आदमी मुझसे यह कह रहा था- जिसने खुद कई बाधाओं के खिलाफ लड़ाई लड़ी है– कि आप अपना काम करें और बिल्कुल आश्वस्त रहें कि यह सरकार केवल वही करने जा रही है जो देश के लिए अच्छा है। मित्तल ने कहा कि इसके बाद उन्हें एक बड़े परिप्रेक्ष्य में उन नियमों पर इसका असर दिखने लगा जो वे मानते थे कि एयरटेल के लिए यह अच्छा नहीं है।
मित्तल ने कहा, "शायद कम टैरिफ बेहतर थे ... डेटा सेवाओं के लोकतंत्रीकरण के लिए कम टैरिफ बेहतर थे। आप चीजों को एक अलग संदर्भ में देखना शुरू करते हैं, क्योंकि आपको आश्वस्त किया जाता है कि यहां कोई एजेंडा नहीं है।" जियो के प्रवेश ने भारत में इंटरनेट के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया क्योंकि सस्ती डेटा दरों के कारण स्मार्टफोन का बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू हुआ। इससे डिजिटल भुगतान जैसी चीजों को अपनाने में तेजी लाने में मदद मिली।