विमान निर्माता कंपनी एयरबस अगले सप्ताह की शुरुआत में राष्ट्रीय राजधानी में अपने निदेशक मंडल की बैठक आयोजित करेगी। यह पहली बार होगा कि एयरबस बोर्ड की बैठक भारत में होगी। भारत इस प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी के लिए एक प्रमुख बाजार है। कंपनी भारत से पहले से ही 1.4 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की सेवाएं और घटक प्राप्त करता है। एयरबस के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि कंपनी भारत के प्रतिभा पूल, इसके संपन्न औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र और इसके स्पष्ट 'मेक इन इंडिया' विजन में बड़ी संभावनाएं देखती है।
भारत के नागरिक उड्डयन और रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपस्थिति रखने वाली एयरबस, H125 हेलीकॉप्टरों और C295 सैन्य विमानों के लिए दो फ़ाइनल असेंबली लाइनें भी स्थापित कर रही है। दोनों फ़ाइनल असेंबली लाइनें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ मिलकर स्थापित की जा रही हैं।
अधिकारी ने बताया कि एयरबस के निदेशक मंडल की बैठक अगले सप्ताह की शुरुआत में राष्ट्रीय राजधानी में होगी। विमान निर्माता कंपनी की ओर से छह दशक पहले यहां परिचालन शुरू करने के बाद यह पहली बार होगा कि बोर्ड की बैठक भारत में हो रही है। एयरबस वेबसाइट के अनुसार, बोर्ड में 12 सदस्य हैं, जिसके अध्यक्ष रेने ओबरमैन हैं। एयरबस के प्रवक्ता ने कहा कि निदेशक मंडल की भारत यात्रा एक महत्वपूर्ण क्षण है और यह देश इसके वैश्विक परिचालन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, "हम पहले ही प्रतिवर्ष 1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के कलपुर्जों और सेवाओं की आपूर्ति का लक्ष्य पार कर चुके हैं। हम इस आंकड़े को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की दिशा में अग्रसर हैं, क्योंकि हम भारत को अपनी वैश्विक मूल्य श्रृंखला में और अधिक एकीकृत करना जारी रखेंगे।" अन्य कम्पनियों के अलावा, इंडिगो और एयर इंडिया ने मिलकर एयरबस को 1,000 से अधिक विमानों का ऑर्डर दिया है।
प्रवक्ता के अनुसार भारत में एयरबस का निवेश हर क्षेत्र में बढ़ रहा है, जिसमें बेंगलुरु में बढ़ते इंजीनियरिंग और डिजिटल केंद्र शामिल हैं, जो इसके विश्वव्यापी परिचालन के अभिन्न अंग हैं, तथा इसके औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार भी शामिल है। प्रवक्ता ने कहा कि यह यात्रा प्रतिबद्धता को मजबूत करेगी तथा भारत के एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में एयरबस की भूमिका को मजबूत करेगी।
मार्च में एयरबस के सीईओ गिलियूम फाउरी ने कहा था कि विमान निर्माता कंपनी भारत से कलपुर्जों और सेवाओं की वार्षिक आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि की जाएगी। यह 2030 से पहले 2 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी।