संयुक्त अरब अमीरात में एक वार्षिक वैश्विक शिखर सम्मेलन में सोमवार को दुनियाभर के एयरलाइंस अधिकारी शामिल हुए। इस सम्मेलन में आगामी एआई परियोजनाओं को लेकर चर्चा हुई। विमानन कंपनियां लंबे समय से कम मार्जिन की समस्या से जूझ रही हैं, ऐसे में एआई के जरिए इनकी उत्पादकता में वृद्धि पर आयोजन के दौरान चर्चा की गई।
एयरलाइंस में हाल फिलहाल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पायलट्स की जगह नहीं ले सकती, लेकिन विमानन उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक उनके व्यापार करने के तरीके में क्रांति ला रही है। दुबई में इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) की 80वीं बैठक से पहले एयर फ्रांस-केएलएम में डेटा साइंस और एआई के प्रमुख जूली पॉजी ने यह बात कही।
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वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर क्षेत्र में तेजी से अपना पैर फैला रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर एयरलाइंस ने बताया कि भविष्य में यह पायलटों की जगह नहीं लेगा, लेकिन विमानन उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक उनके व्यापार करने के तरीके में तेजी से बदलाव ला रहे हैं। एयर फ़्रांस-केएलएम में डेटा विज्ञान और एआई के प्रमुख जूली पोजी ने विमानन क्षेत्र के लिए डेटा और एआई को एक शानदार लीवर बताया।
संयुक्त अरब अमीरात में एक वार्षिक वैश्विक शिखर सम्मेलन में सोमवार को एयरलाइंस अधिकारी शामिल हुए। इस सम्मेलन में आगामी एआई परियोजनाओं को लेकर चर्चा हुई। विमानन कंपनियां लंबे समय से ही कम लाख मार्जिन की आदी है, लकिन एआई के जरिए इसके उत्पादकता में वृद्धि हो सकती है।
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एआई के जरिए लोगों तक जल्द पहुंचेंगी जानकारी
अमेरिका स्थित फर्म बेन एंड कंपनी में एयरलाइन उद्योग के प्रमुख सलाहकार जेफ्री वेस्टन ने कहा, "एआई वास्तव में सही लोगों तक सही जानकारी जल्द से जल्द पहुंचाने में मददगार है।" जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करते हुए 40 से अधिक परियोजनाओं के साथ एयर फ्रांस-केएलएम ऐसा कर रहा है। फ्रेंच-डच कंपनी की योजनाओं में एक ऐसा टूल है जो ग्राहकों को 85 अलग-अलग भाषाओं में जवाब देता है। इसे एयर फ्रांस एजेंटों के टैबलेट पर इंस्टॉल किया जाएगा और 2025 तक पेरिस चार्ल्स डे गॉल एयरपोर्ट पर लागू कर दिया जाएगा।
एयरपोर्ट पर कई एआई पहल की शुरुआत
एयरपोर्ट के संचालक, ग्रुप एडीपी ने स्टार्टअप के सहयोग से कई एआई पहल शुरू की हैं, जिसमें एलोब्रेन भी शामिल है। इसे एयरपोर्ट पर फोन कॉल का जवाब देने के लिए आवाज की पहचान करने के लिए उपयोग किया जाता है। इस पहल से अनुत्तरित फोन कॉल की संख्या में गिरावट देखने को मिली। अनुत्तरित फोन कॉल की संख्या अब 50 फीसदी से घटकर 10 फीसदी तक हो चुकी है।