बजट में दलहन आत्मनिर्भर मिशन और पीएम धन-धान्य योजना शुरू करना अच्छा कदम है, लेकिन इसका क्रियान्वयन कैसे होगा, ये समय ही बताएगा। किसानों को जो चीज तुरंत लाभ देगी वो है किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ना। मैं कृषि के बजट को बी प्लस ग्रेड देता हूं। इस तरह से कई कदम जो लिए जा रहे हैं, अच्छे हैं। जिनका असर भी जमीन पर दिखेगा। लेकिन योजनाओं की घोषणा करने से ज्यादा जरूरी होता है कहां कितना पैसा दिया गया। रिफार्म्स कहां कर रहे हैं? अगर बजट में कृषि के लिए आवंटित राशि को देखें, तो जो पिछले साल करीब 1.31 लाख करोड़ के आसपास थी, इस बार उसमें 3-3.5% की ही बढ़त है। अगर महंगाई 5% के आसपास है, तो ये पिछले साल से भी कम हो जाता है।
किसानों को पैसे मिलेंगे, रिस्क होगा कम
दलहन मिशन के अंतर्गत दाल खरीदने से किसान को थोड़े पैसे मिलेंगे और रिस्क कम होगा। धान को अधिक सब्सिडी मिलने से फूड बास्केट गड़बड़ा गई है। चावल अधिक है, तेल और दाल कम है। सरकार अगर जिन फसलों को बढ़ावा देना चाहती है, उसे उगाने पर किसान को इन्सेन्टिव दिया जा सकता है।
लेबर की कमी दूर करना होगा
भारतीय कृषि के सामने जो एक बड़ी समस्या है, कृषि से लेबर फोर्स जो बाहर निकल रहा था, वो 2019 के बाद बढ़ना शुरू हो गया है। उसका प्रतिशत कम करना जरूरी है। ऐसा किसी देश में नहीं होता। भारत में खेती को बदलना है तो जैसे दुग्ध उत्पादन को लेकर ऑपरेशन फ्लड चलाया गया था। वैसे की कृषि के लिए ऑपरेशन चलाए जाएं, जिसके बड़े परिणाम दिखेंगे।