अदाणी ग्रुप विवाद से देश के हरित ऊर्जा क्षेत्र पर संकट मंडरा सकता है। अदाणी ग्रुप ने विभिन्न राज्यों के साथ मिलकर हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की बड़ी योजनाएं तैयार की थी, लेकिन हिंडनबर्ग रिपोर्ट में हरित ऊर्जा क्षेत्र में काम कर रही अदाणी ग्रुप की कंपनियों पर भी सवाल उठाए गए हैं और इनका बाजार भाव लगातार टूट रहा है। लिहाजा अनुमान लगाया जा रहा है कि पूंजी के अभाव में कंपनी का हरित ऊर्जा क्षेत्र में होने वाला निवेश प्रभावित हो सकता है। इससे देश के हरित ऊर्जा क्षेत्र में तय किए गए लक्ष्य को हासिल करने में भी मुश्किलें आ सकती हैं।
बड़े समझौतों पर पड़ सकता है असर
अदाणी रिन्यूएबल एनर्जी होल्डिंग फॉर लिमिटेड अदाणी ग्रुप की बड़ी कंपनी है, जो अपनी विभिन्न आनुषंगिक कंपनियों के माध्यम से हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करती है। अदाणी ग्रुप हरित ऊर्जा क्षेत्र में विभिन्न कंपनियों के माध्यम से लगभग 20 गीगावाट हरित ऊर्जा उत्पादन की क्षमता हासिल कर चुका है। ग्रुप का देश के अनेक बंदरगाहों पर अधिकार है। स्वयं गौतम अदाणी ने गत वर्ष के सितंबर माह में घोषणा की थी कि उनकी कंपनी बंदरगारों पर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन करने के लिए 70 अरब डॉलर का निवेश करेगी।
समूह ने 2030 तक 30 लाख टन हाइड्रोजन ऊर्जा क्षमता को भी अपने हरित ऊर्जा बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। हाल ही में इस कंपनी ने राजस्थान सरकार के संयुक्त उद्यम में 150 अरब डॉलर के निवेश से हरित ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया था। लेकिन हिंडनबर्ग रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिस तरह इन हरित ऊर्जा कंपनियों पर संकट गहराया है, ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि उससे हरित ऊर्जा उत्पादन और भविष्य की योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
भारतीय सौर ऊर्जा निगम के माध्यम से भी अदाणी समूह ने पीपीए मॉडल में हरित ऊर्जा उत्पादन में करार किया था। दिसंबर 2021 में हुए इस समझौते को अब तक का सबसे बड़ा पीपीए समझौता करार दिया गया था। इस समझौते में 4667 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन इस समझौते पर भी ताजा विवाद का असर पड़ सकता है। इसी प्रकार के कई अन्य बड़े समझौतों पर भी इस विवाद का साया पड़ सकता है।
नहीं पड़ेगा असर- केंद्र
हालांकि, देश के केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने दावा किया है कि अदाणी ग्रुप पर आए संकट से देश के हरित ऊर्जा उत्पादन या निर्धारित लक्ष्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार के पास दुनिया की एक दर्जन से ज्यादा बड़ी हरित ऊर्जा क्षेत्र में काम कर रहीं कंपनियां उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से भविष्य के हरित ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने का विकल्प मौजूद है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि हरित ऊर्जा क्षेत्र से ऊर्जा उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ पाएगा।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत का लक्ष्य
संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP-26) में भारत ने 2030 तक अपनी कुल ऊर्जा आवश्यकता का 40 फीसदी हरित और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, सरकार का दावा है कि उसने लगभग 30 फीसदी हरित ऊर्जा प्राप्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है, लेकिन ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि देश अभी लगभग 20 फीसदी लक्ष्य ही हासिल कर सका है। निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है।
मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी के एक आंकड़े के अनुसार सौर ऊर्जा उपकरणों को लगाने के मामले में भारत दुनिया में चौथे नंबर पर पहुंच चुका है। भारत इस समय लगभग 61.97 गीगावाट ऊर्जा उत्पादन की क्षमता प्राप्त कर चुका है। देश ने 2030 तक 5 MT ग्रीन हाइड्रोजन गैस उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अनुमान है कि इस मद में इस वर्ष लगभग 10 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश प्राप्त हो सकता है। इससे इस वर्ष तक हरित ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य में भारत काफी मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।