कारोबार में वजन और माप की छोटी-सी गलती भी व्यापारियों और ग्राहकों के बीच विवाद की वजह बन सकती है। वहीं, अगर सामान का वजन, उसकी मात्रा और माप सही हों, तो खरीद-बिक्री आसान होती है और व्यापार में अनावश्यक रुकावटें कम होती हैं। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने सोमवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि सटीक माप-तौल न केवल व्यापार को सुचारु बनाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि माप से जुड़े नियम व्यापार में बाधा न बनें।
लीगल मेट्रोलॉजी का आसान अर्थ है माप-तौल से जुड़े उन नियमों और व्यवस्थाओं से, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी वस्तु का वजन, मात्रा या माप सही हो और तय मानकों के अनुरूप हो।
उदाहरण के लिए, ग्राहक एक किलो चीनी खरीदता है, पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाता है या किसी पैकेट पर लिखी मात्रा के आधार पर सामान खरीदता है। इन सभी मामलों में सही माप-तौल जरूरी है। इससे ग्राहक को उतनी ही मात्रा मिलती है, जितने का वह भुगतान करता है। साथ ही, व्यापारियों को भी माप से जुड़े विवादों और अनिश्चितताओं से बचने में मदद मिलती है।
भारत पहली बार इंटरनेशनल कमेटी ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी (सीआईएमएल) की बैठक की मेजबानी कर रहा है। निधि खरे ने इसे देश के लिए गर्व का विषय बताया।
तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन में 32 सदस्य देशों के करीब 70 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनके अलावा पेरिस स्थित इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स (बीआईपीएम) और कई संपर्क संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
इस बैठक के जरिए भारतीय अधिकारियों को दूसरे देशों में माप-तौल के नियमों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं में हो रहे बदलावों को समझने का अवसर मिलेगा। इससे भारत को अपने माप-तौल संबंधी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय जरूरतों के अनुरूप बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
अलग-अलग देशों में माप-तौल के नियमों और मानकों में तालमेल न होने पर व्यापारियों को अतिरिक्त प्रक्रियाओं और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकों के बीच सामंजस्य व्यापार को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निधि खरे ने कहा कि नए माप उपकरण तेजी से घरेलू और व्यावसायिक इस्तेमाल में आ रहे हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इन उपकरणों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं में तालमेल हो तथा उनकी जवाबदेही वैश्विक स्तर पर सुनिश्चित की जा सके।
इसका उद्देश्य यह है कि माप-तौल की विश्वसनीयता बनी रहे और अलग-अलग बाजारों में कारोबार करने वालों को अनावश्यक बाधाओं का सामना न करना पड़े।
निधि खरे के अनुसार, भारत को वैश्विक अनुभव से सीखते हुए अपने माप-तौल संबंधी ढांचे को लगातार अपडेट करते रहना होगा। यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि नई तकनीक और नए उपकरणों के आने से माप-तौल की जरूरतें बदल रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जा रहे तौर-तरीकों को समझने से भारत को अपने नियमों और व्यवस्थाओं की समीक्षा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बैठक से जुड़े किसी विशिष्ट नए नियम या नीति बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।
इंटरनेशनल कमेटी ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी की 61वीं बैठक 26 अक्तूबर से शुरू हुई है और इसका समापन 28 अक्टूबर को होगा। इसका आयोजन उपभोक्ता मामलों के विभाग ने इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी (ओआईएमएल) के सहयोग से किया है।
ओआईएमएल का सचिवालय हर साल यह बैठक आयोजित करता है। इसके लिए सदस्य देशों और संगठन के मुख्यालय में आयोजन किया जाता है। इस बार भारत में हो रही बैठक का प्रमुख उद्देश्य वैश्विक माप-तौल व्यवस्था से जुड़े अनुभवों और बदलावों पर चर्चा करना है।