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8th Pay Commission: आयोग की अहम डेडलाइन आज होगी खत्म, क्या केंद्रीय कर्मियों की सैलरी बढ़ने का रास्ता हुआ साफ?

Tue, 30 Jun 2026 02:36 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए  वेतन आयोग से जुड़ी बड़ी खबर। आज खत्म हो रही है पे रिवीजन डेटा सबमिट करने की डेडलाइन। आगे क्या होगा? पूरी डिटेल जानने के लिए अभी पढ़ें।
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8वां वेतन आयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे लाखों लोगों के लिए आज यानी 30 जून 2026 का दिन बेहद अहम है। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के तहत पे रिवीजन (वेतन संशोधन) के लिए जरूरी डेटा जमा करने की समय सीमा मंगलवार को समाप्त हो रही है। केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों, संगठनों और कार्यालयों के लिए यह आखिरी मौका है, क्योंकि आयोग की तरफ से अभी तक इस डेडलाइन को आगे बढ़ाने का कोई एलान नहीं किया गया है। 

डेटा जमा करने के लिए आयोग की क्या शर्तें हैं?

आठवें वेतन आयोग ने साफ कर दिया है कि डेटा सबमिशन की यह पूरी प्रक्रिया सख्ती से केवल ऑनलाइन ही की जानी है। इसके लिए आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक खास पोर्टल और समर्पित लिंक मुहैया कराया है। 

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आयोग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि कोई भी विभाग भौतिक रूप (फिजिकल फॉर्म) में डेटा भेजता है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि प्रिंट किए गए दस्तावेज, स्टैंडअलोन एक्सेल शीट, हार्ड कॉपी या ईमेल के जरिए भेजी गई जानकारी को आयोग सिरे से खारिज कर देगा। दिशा-निर्देशों के अनुसार, तय समय के भीतर केवल आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड किए गए डेटा पर ही आयोग द्वारा विचार किया जाएगा।

यह प्रक्रिया किन कर्मचारियों के लिए अहम है?

केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को एक अधिसूचना के जरिए आठवें वेतन आयोग का गठन किया था। इसी दिन सरकार ने आयोग की 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (टीओआर) यानी विचार योग्य विषय भी जारी किए थे। इसका मुख्य उद्देश्य समकालीन जरूरतों, विशेष आवश्यकताओं और काम के स्वरूप को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं (नकद या वस्तु के रूप में) में उचित बदलाव की सिफारिश करना है। इस आयोग की सिफारिशों का सीधा असर निम्नलिखित श्रेणियों के कर्मचारियों पर पड़ेगा:

  • औद्योगिक और गैर-औद्योगिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी।
  • अखिल भारतीय सेवाओं के कर्मचारी।
  • रक्षा बलों के जवान और अधिकारी।
  • केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी।
  • भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी।
  • संसद के अधिनियमों के तहत स्थापित नियामक निकायों के सदस्य (आरबीआई को छोड़कर)।
  • सुप्रीम कोर्ट के अधिकारी और कर्मचारी।
  • हाई कोर्ट के ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जिनका खर्च केंद्र शासित प्रदेश उठाते हैं।
  • केंद्र शासित प्रदेशों की अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारी।

सैलरी और भत्ते तय करने से पहले किन बातों पर होगा विचार?

वेतन और भत्तों पर अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करने से पहले 8वां वेतन आयोग कई महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यावहारिक पहलुओं पर गहराई से गौर करेगा। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की जरूरत।
  • विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता।
  • गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की बिना फंड वाली लागत का आंकलन।
  • राज्य सरकारों के वित्त पर पड़ने वाला संभावित असर, क्योंकि राज्य सरकारें भी अक्सर कुछ बदलावों के साथ इन सिफारिशों को अपने यहां लागू करती हैं।
  • केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को मिलने वाले मौजूदा वेतन ढांचे, भत्ते और काम करने की स्थिति।

आज ऑनलाइन डेटा जमा करने की मियाद खत्म होने के साथ ही आठवें वेतन आयोग का काम अपने अगले और सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर जाएगा। पोर्टल पर प्राप्त हुए इस राष्ट्रव्यापी डेटा का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही आयोग यह तय करेगा कि मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी के स्ट्रक्चर में क्या और कितने बदलाव किए जाएं।

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