भारत के बड़े कॉर्पोरेट घरानों में संपत्ति और व्यापार पर नियंत्रण को लेकर विवाद होना आम बात हो गई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में दो प्रमुख व्यापारिक घरानों- 'सोना ग्रुप' और 'गॉडफ्रे फिलिप्स' के पारिवारिक विवादों पर अहम सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे पारिवारिक व्यापारिक झगड़ों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए लंबी मुकदमेबाजी के बजाय शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया है।
ऑटोमोटिव सेक्टर की जानी-मानी कंपनी सोना ग्रुप के भीतर इन दिनों एक बड़ा कानूनी विवाद चल रहा है। यह विवाद 80 वर्षीय रानी कपूर और उनकी बहू प्रिया सचदेवा कपूर के बीच है। रानी कपूर ने 'रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट' के गठन को चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि यह ट्रस्ट धोखे से बनाया गया था।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय विश्नोई की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने 80 वर्षीय रानी कपूर की उम्र का हवाला देते हुए कहा, "आप 80 साल की हैं। यह उम्र आपके मुवक्किल के लिए कोर्ट में लड़ने की नहीं है"।
पारिवारिक कॉर्पोरेट विवादों के बीच गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया से एक सकारात्मक खबर सामने आई है। कंपनी के पूर्व कार्यकारी निदेशक समीर मोदी और उनकी मां बीना मोदी के बीच चल रहा संपत्ति और मारपीट का विवाद अब सुलझ गया है।
मई 2024 में एक बोर्ड मीटिंग के दौरान समीर मोदी ने आरोप लगाया था कि उनकी मां के सुरक्षा अधिकारी ने उनके साथ मारपीट की, जिससे उनकी उंगली टूट गई थी। लेकिन अब दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सौरभ बनर्जी को सूचित किया गया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है और समीर मोदी ने अपनी शिकायत वापस ले ली है। इसके बाद कोर्ट ने बीना मोदी और अन्य के खिलाफ दर्ज मामला रद्द कर दिया।