अमेरिका की ओर से भारत से निर्यात की जाने वाले उत्पादों 50 प्रतिशत निर्यात शुल्क बढ़ाए जाने की घोषणा का सबसे अधिक असर भारत के टेक्सटाइल और जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर पर होने की आशंका है। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि इस क्षेत्र में बड़े निर्यातकों पर तो असर पड़ेगा ही, लेकिन छोटे और मध्यम दर्जे (एमएसएमई) के निर्यातकों व उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
कंफेडरेशन ऑफ इंडिया टेक्सटाइल इंडस्ट्री के अनुसार भारत में परिधान निर्यातक पहले से ही धीमे हो चुके हैं और अब इस टैरिफ की वजह से भारतीय परिधान बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की वजह से पीछे रह जाएंगे। इसकी वजह से इस क्षेत्र में लगे 4 लाख से अधिक लोगों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मौजूदा समय में टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 40 लाख से अधिक लोग काम करते हैं। वहीं परिधान क्षेत्र से 1.1 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार सृजनकर्ता भी है, जिनमें कई महिलाएं और ग्रामीण आबादी शामिल हैं। इस उद्योग की समग्री प्रकृति के साक्ष्य के रूप में, जिसमें लगभग 80 प्रतिशत देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) में शामिल है।
20,000 निर्माताओं और निर्यातकों का प्रतिनिधित्व करने वाले क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुख्य सरंक्षक राहुल मेहता ने बताया कि भारत पर लगे 50 प्रतिशत टैरिफ की वजह से भारत के परिधान उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्योंकि अब भारतीय परिधानों की लागत 30 से 35 प्रतिशत बढ़ जाएगी, उसकी तुलना में बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों जिन पर टैरिफ शुल्क कम है उनको फायदा मिलने की पूरी संभावना है। उनका कहना है कि यह स्थिति बहुत ही तनापूर्ण है और इस समय मौजूदा शिपमेंट रुक गए हैं वहीं निर्यात ऑर्डर में भी भारी गिरावट देखने को मिल रही है। इसमें बड़े निर्यातक ही नहीं एमएसएमई निर्यातक को भारी नुकसान होगा।
उदाहरण के लिए बड़ा निर्यात 10 बिलियन डॉलर का ऑर्डर खोता है तो वह उसके लिए बड़ी रकम है, वहीं छोटे निर्यातक 2 बिलियन का ऑर्डर कैंसल होता है तो वह उसके लिए बड़ी परेशानी है। उन्होंने बताया कि इस साल बड़े हुए टैरिफ की वजह से परिधान निर्यात को 2 से 3 बिलियन डॉलर का घाटा होगा। इस वजह से कारखाने बंद हो सकते हैं और बेरोजगारी बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है, जिसमें सबसे अधिक एमएसएमई सेक्टर प्रभावित होगा। लगभग एक अरब डॉलर मूल्य का सामाना या तो तैयार है या पाइपलाइल में है, लेकिन 27 अगस्त की समय सीमा तक नहीं पहुंच पाएगा। भारत में परिधार निर्यातकों की आधिकारी संस्था परिधान निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष सुधीर सेखरी के कहते है इसके लिए खरीदार 25 से 30 तक छूट की मांग कर रहे हैं।
महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर के अध्यक्ष ललित गांधी इस निर्णय को भारत ऊर्जा और संप्रभुता पर हमला मानते हैं, उनका कहना है कि इसका असर सीधे तौर पर एमएसएमई सेक्टर होगा क्योंकि वह सबसे कम मार्जिन पर काम करता है। नीतिगत दबाव की वजह से छोटे उत्पादकों और निर्यातकाकें और व्यापारियों की रीढ़ को तोड़ सकता है। वे कहते हैं कि वस्त्र और परिधान यह रोजगार देने वाला क्षेत्र सबसे कमजोर है, फिलहाल के लिए जो ऑर्डर पाइपलाइन में है उनको नुकसान से बचाने के लिए सरकार ब्याज सब्सिडी राजकोषिय प्रोत्साहन (रोडीटीईपी) योजना के तहत विस्तार कर सकती है।