जीएसटी अधिकारियों की ओर से देशभर में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पिछले 49 दिनों में 4,972 फर्जी जीएसटी पंजीकरण रद्द किए गए हैं। साथ ही 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी पकड़ी गई है। इस अभियान में अब तक 16,989 जीएसटीआईएन (जीएसटी पहचान संख्या) की पहचान की गई है, जो मौजूद नहीं हैं।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के सदस्य शशांक प्रिय ने बुधवार को बताया कि दो महीने के इस विशेष अभियान में अब तक फर्जी जीएसटी पंजीकरण के बड़ी संख्या में मामले देखने को मिले हैं। यह दिखाता है कि जीएसटी पंजीकरण एवं रिटर्न प्रक्रिया को और सख्त बनाने की जरूरत है।
एसोचैम के जीएसटी राष्ट्रीय सम्मेलन में शशांक ने कहा कि इस अभियान के तहत 4 जुलाई तक 69,600 से अधिक जीएसटीआईएन को भौतिक रूप से सत्यापन के लिए चुना गया था। इसमें से 59,178 को फील्ड अधिकारी सत्यापित कर चुके हैं। जांच के दौरान पता चला कि 16,989 जीएसटीआईएन मौजूद ही नहीं हैं। इसके अलावा 11,01,5 जीएसटीआईएन को निलंबित किया गया है, जबकि 4,972 जीएसटी पंजीकरण रद्द किए गए हैं। जीएसटी के तहत फर्जी पंजीकरण पर अंकुश लगाने के लिए 16 मई से शुरू विशेष अभियान 15 जुलाई को समाप्त होगा।
87 करोड़ रुपये की कर वसूली
बोर्ड के सदस्य ने बताया कि फर्जीवाड़े के इन मामलों में 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का पता चला है। करीब 1,506 करोड़ रुपये का इनपुट कर क्रेडिट (आईटीसी) ब्लॉक किया गया है और 87 करोड़ रुपये के कर की वसूली की गई है। 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से यानी छह साल के दौरान पंजीकृत कंपनियों की संख्या दोगुना बढ़कर 1.40 करोड़ पहुंच गई है। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक फर्जी तरीकों से करीब 3 लाख करोड़ रुपये की कर चोरी होने का अनुमान है।
फर्जीवाड़ा रोकने के लिए की दूर करनी होंगी खामियां
शशांक ने कहा कि अभियान के दौरान फर्जीवाड़े और कर चोरी के जो मामले सामने आए हैं, उसे देखते हुए हमें पंजीकरण और रिटर्न व्यवस्था की खामियों की पहचान करनी होगी। इसके अलावा पंजीकरण सत्यापन के लिए जोखिम मापदंडों को और अधिक सख्त करने की जरूरत है।
जीएसटीआर-3बी को आसान बनाने की जरूरत
कारोबारी सुविधा के मोर्चे पर शशांक ने कहा कि मासिक और रिटर्न फॉर्म जीएसटीआर-3बी देकर को और अधिक व्यापार अनुकूल बनाने की जरूरत है। जीएसटी के तहत फर्जी कांत पंजीकरण एक बड़ा जोखिम हैं क्योंकि धोखाधड़ी करने वाले लोग जाली बिल या इनवॉयस जारी कर गलत तरीके से आईटीसी लेते हैं और सरकार को चूना लगाते हैं।