भारत का एआई इकोसिस्टम अब केवल कॉरपोरेट बोर्डरूम और नीतिगत चर्चाओं तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह अब जमीनी स्तर पर नवाचार की ओर बढ़ रहा है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के तहत, 'YuvAi' पहल के तहत आयोजित हैकथॉन ने देश की युवा प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान किया है। टाटा के सहयोग से आयोजित इस इस हैकथॉन में 3,000 छात्रों ने हिस्सा लिया और भारत की विविधता को ध्यान में रखते हुए 'वर्नाकुलर' (क्षेत्रीय भाषाई) समाधान पेश किए। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव भी इस आयोजन के दौरान मौजूद रहे।
केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एआई भारत की बड़ी क्षमताओं में से एक बन रहा है। जिस तरह से हमारे छात्र, रिसर्चर, स्टार्टअप, आईटी इंडस्ट्री एआई का इस्तेमाल करके एक अलग स्तर पर नए समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं, वह देश की एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमेशा टेक्नोलॉजी को डमोक्रेटाइज करने का एक विजन दिया है, उसी विजन के साथ एआई में भी भारत एक नई पहचान बना रहा है।
यह इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के उस व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें एआई को केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव के उपकरण के रूप में देखा जा रहा है। हैकथॉन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैश्वणव ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए 3,000 छात्रों के साथ सीधा संवाद किया। इस बातचीत का मुख्य आकर्षण छात्रों द्वारा प्रस्तावित 'डोमेन-आधारित वर्नाकुलर स्तर के समाधान' थे।
व्यावसायिक दृष्टिकोण से, यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। भारत जैसे विविध भाषाई देश में, अंग्रेजी-आधारित एआई मॉडल की पहुंच सीमित है। छात्रों द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं में समाधान विकसित करना यह दर्शाता है कि अगली पीढ़ी के स्टार्टअप्स टीयर-2 और टीयर-3 शहरों की समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ये समाधान संभवतः कृषि, स्थानीय एमएसएमई और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल डिवाइड को कम करने में मददगार साबित होंगे। छात्रों का यह प्रयास मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन के उस बयान से मेल खाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि एआई मिशन का फोकस 'हाइप' पर नहीं, बल्कि 'इम्पैक्ट' और प्रोडक्टिविटी पर है।