भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का पावरहाउस बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 'इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' (ईसीएमएस) के तहत 22 नए निवेश प्रस्तावों को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से देश में ₹41,863 करोड़ का भारी-भरकम निवेश आने का अनुमान है, जिससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी बल्कि रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे।
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इन 22 स्वीकृत प्रस्तावों से कुल ₹2,58,152 करोड़ के उत्पादन की उम्मीद है। इस औद्योगिक विस्तार का सबसे सकारात्मक पहलू रोजगार सृजन है; अनुमान है कि इन परियोजनाओं से देश में लगभग 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
इससे पहले सरकार ने ₹12,704 करोड़ के निवेश के लिए 24 आवेदनों को मंजूरी दी थी। नए प्रस्तावों को मिलाकर अब इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में निवेश की गति और तेज होने की उम्मीद है। मंत्रालय के अनुसार, इन मंजूरियों में 11 प्रमुख लक्षित सेगमेंट शामिल हैं। इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी है मूल घटक हैं। इसके तहत पीसीबी (पीसीबी), कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोजर और लिथियम-आयन सेल का निर्माण होना है। इसकी दूसरी श्रेणी है- सब-असेंबली। इसके तहत कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांससीवर। इसके बाद तीसरी श्रेणी है- एल्युमीनियम एक्सट्रूजन, एनोड सामग्री और लैमिनेट्स।
इन घटकों का उपयोग मोबाइल फोन, दूरसंचार उपकरण, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर जैसे विविध क्षेत्रों में किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों के लिए आयात पर निर्भरता को कम करना और 'मेड इन इंडिया' उत्पादों की वैल्यू चेन को मजबूत करना है। सरकार ने इन परियोजनाओं के चयन में भौगोलिक संतुलन का भी ध्यान रखा है। स्वीकृत परियोजनाएं देश के आठ राज्यों में फैली हुई हैं। ये राज्य हैं- उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान (उत्तर भारत), तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक (दक्षिण भारत) महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश (मध्य और पश्चिम भारत)।