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ED: 12 साल से नहीं मिली थी घर की चाभी, अब ईडी ने 200 खरीदारों को दिलाया हक, करोड़ों में पहुंच चुका बाजार मूल्य

Wed, 15 Oct 2025 01:07 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ईडी ने 200 से अधिक घर खरीदारों को 175 करोड़ रुपये मूल्य के फ्लैट, वाणिज्यिक इकाइयां और प्लॉट्स वापस लौटा दिए हैं। ये खरीदार 12 साल से अधिक समय से अपने सपनों के घर का कब्जा पाने का इंतजार कर रहे थे।
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ईडी की कार्रवाई - फोटो : ANI
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विस्तार
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उदयपुर में 12 साल से अपने घरों का इंतजार कर रहे 200 से ज्यादा घर खरीदारों को आखिरकार राहत मिली है। ईडी ने मंगलवार को बताया कि उसने 'रॉयल राजविलास (आरआरवी)' प्रोजेक्ट से जुड़ी 354 फ्लैट्स, 17 कमर्शियल यूनिट्स और 2 प्लॉट्स को बहाल किया है। इनकी कुल कीमत करीब 175 करोड़ रुपये है।

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धन शोधन से संबंधित है मामला

ईडी के अनुसार, यह संपत्तियां उन खरीदारों को सौंपी गई हैं जिन्होंने कई साल पहले इस प्रोजेक्ट में निवेश किया था, लेकिन बिल्डर की वित्तीय गड़बड़ियों के चलते उन्हें अब तक कब्जा नहीं मिल सका था। यह मामला भारत बम्ब नामक एक आरोपी के खिलाफ धन शोधन जांच से संबंधित है। इसमें कुछ अन्य लोग भी शामिल हैं, जिन पर 2011 से 2016 के बीच सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक) के साथ 1267.79 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। 

ईडी की कार्रवाई

ईडी ने इस मामले में अप्रैल, 2019 में 535 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी, जिसमें उदयपुर एंटरटेनमेंट वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड (यूईडब्ल्यूपीएल) नामक कंपनी की बिना बिकी/अपंजीकृत इन्वेंट्री के रूप में 83.51 करोड़ रुपये की संपत्ति भी शामिल थी। इस कुर्की आदेश के खिलाफ कई मामले दायर किए गए और कंपनी (यूईडब्ल्यूपीएल) को बाद में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष दिवालियापन के लिए स्वीकार कर लिया गया।

यूईडब्ल्यूपीएल की समाधान योजना को एनसीएलटी, मुंबई द्वारा फरवरी, 2022 में मंजूरी दे दी गई थी, क्योंकि इसने अप्रैल, 2019 के ईडी कुर्की आदेश (यूईडब्ल्यूपीएल की संपत्तियों की कुर्की के संबंध में) को भी रद्द कर दिया था। एजेंसी ने कहा कि यह उल्लेख करना उचित है कि एनसीएलटी के समक्ष कार्यवाही में ईडी को पक्ष नहीं बनाया गया था।

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बाद में, मामला राजस्थान उच्च न्यायालय में गया और कई सुनवाइयों के बाद उसने आदेश दिया कि ईडी को इस मामले में नुकसान हुआ है, क्योंकि एनसीएलटी के समक्ष कार्यवाही में उसे पक्षकार नहीं बनाया गया। इसके तुरंत बाद, यूईडब्ल्यूपीएल के नए प्रबंधन ने राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

ईडी के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को आम सहमति पर पहुंचने का निर्देश दिया, ताकि वास्तविक घर खरीदारों के हितों की रक्षा की जा सके, जिन्होंने परियोजना में अपना पैसा लगाया था और विभिन्न न्यायिक मंचों के समक्ष लंबित उपरोक्त कानूनी कार्यवाही के कारण अपनी इकाइयों/फ्लैटों पर कब्जा नहीं पा सके थे।

बयान में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के वास्तविक घर खरीदारों के हितों की रक्षा के निर्देशों के मद्देनजर, ईडी ने यूईडब्ल्यूपीएल के समाधान पेशेवर और नए प्रबंधन से संपर्क कर उन सभी घर खरीदारों का ब्यौरा मांगा है, जिनके दावे एनसीएलटी, मुंबई के समक्ष स्वीकार किए गए थे।

ईडी ने घर खरीदारों के विवरण की जांच की 

ईडी ने घर खरीदने वालों के विवरण की जांच की और कुछ संपत्तियों को छोड़कर वास्तविक घर खरीदने वालों के लाभ के लिए कुर्क की गई संपत्तियों की वापसी (बहाली) के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' प्रस्तुत किया।

इसमें कहा गया है कि एजेंसी ने पीएमएलए के उद्देश्यों से समझौता किए बिना व लंबी मुकदमेबाजी के कारण पीड़ित 213 घर खरीदारों के हित में सामंजस्यपूर्ण समाधान पर पहुंचने के लिए सक्रिय दृष्टिकोण अपनाया।

ईडी द्वारा दिए गए हलफनामे के मद्देनजर, सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्तूबर को एक आदेश जारी किया, जिसमें कुर्क की गई संपत्तियां, जिनका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 175 करोड़ रुपये है, अब वास्तविक और निर्दोष घर खरीदारों के एकमात्र लाभ के लिए उदयपुर एंटरटेनमेंट वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड के सफल समाधान आवेदक को पीएमएलए की धारा 8 (8) के तहत वापस कर दी गई हैं।

213 निर्दोष घर खरीदारों को मिला न्याय

ईडी ने कहा कि इससे 213 निर्दोष घर खरीदारों की दुर्दशा समाप्त हो गई है, जो अपनी मेहनत की कमाई और यूईडब्ल्यूपीएल और ईडी के बीच सात साल से अधिक समय तक चले मुकदमे के बाद 12 साल से अधिक समय से पीड़ित थे।

ईडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर विचार किए बिना ही मामले के विशिष्ट तथ्यों के आधार पर आदेश पारित कर दिया है और यह भी कहा है कि इसे मिसाल नहीं माना जाएगा तथा कानून के प्रश्न उचित मामले में निर्णय के लिए खुले रहेंगे।

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