संसद के एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि ई-वाहनों के उपयोग और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से शुरू की गई पेपरलेस कार्यालय जैसी पहलों से 17वीं लोकसभा के चार वर्षों के कार्यकाल के दौरान 801.46 करोड़ रुपये बचाए गए।
17वीं लोकसभा ने अपने एक चौथाई से अधिक के बजट की बचत की
मई 2019 में 17 वीं लोकसभा के गठन के बाद से चार वर्षों में किए गए बजटीय प्रावधानों में से लगभग एक चौथाई की बचत की गई है। संसद के अधिकारी ने कहा कि लोकसभा सचिवालय ने वित्त वर्ष 2021-22 में 258.47 करोड़ रुपये और 2022-23 में 132.60 करोड़ रुपये बचाए। 12वीं लोकसभा, जिसका कार्यकाल 13 महीने का था, कुल बजटीय आवंटन में से 7.01 करोड़ रुपये बचाने में कामयाब रही थी। 13 वीं लोकसभा (1999-2004) ने पांच साल की अवधि के दौरान अपने आवंटन में से 99.52 करोड़ रुपये की बचत की।
कोरोना महामारी के कारण भी लोकसभा के खर्चे में आई कमी
14 वीं लोकसभा में बचत 145.07 करोड़ थी। 15वीं लोकसभा ने 94.17 करोड़ रुपये और 16 वीं लोकसभा ने 461 करोड़ रुपये बचाए थे। 17वीं लोकसभा के दौरान रिकॉर्ड बचत का कारण कोविड-19 महामारी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की ओर से शुरू किए गए मितव्ययिता के उपाय रहे हैं। इन उपायों की मदद से लोकसभा के खर्च में कटौती हुई है। पिछले चार वर्षों के दौरान लोकसभा कार्यालय को कागज रहित बनाने और ई-वाहनों की शुरुआत जैसी कई पहलों के कारण ईंधन लागत में भारी बचत हुई है।