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सर्विस सेक्टर में उछाल: जुलाई में 10 उप-क्षेत्रों ने दर्ज की दोहरे अंकों की ग्रोथ, जानिए कहां गिरावट?

Tue, 29 Sep 2026 05:23 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा जारी इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (ISP) के जुलाई 2026 के आंकड़ों में 19 में से 10 उप-क्षेत्रों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। जानिए रिटेल, बैंकिंग और एयर ट्रांसपोर्ट का प्रदर्शन कैसा रहा। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
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सेवा क्षेत्र पीएमआई - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भारतीय अर्थव्यवस्था के सर्विस सेक्टर के मोर्चे पर एक राहत भरी और सकारात्मक खबर आई है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से मंगलवार को जारी इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (आईएसपी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में कुल 19 उप-क्षेत्रों में से 10 उप-क्षेत्रों ने दोहरे अंकों में ग्रोथ दर्ज की है। सालाना आधार पर जारी इन आंकड़ों से साफ होता है कि देश में सेवा गतिविधियों की मांग में विस्तार देखा जा रहा है। मंत्रालय की ओर से प्रकाशित किए गए इन आंकड़ों में 19 में से 17 उप-क्षेत्रों ने जुलाई महीने में सकारात्मक वृद्धि हासिल की है।

क्या हैं जुलाई 2026 के इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन के प्रमुख आंकड़े?

सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 के लिए 19 उप-क्षेत्रों का इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन 2024-25 को आधार वर्ष मानकर तैयार किया गया है। जुलाई 2025 की तुलना में जुलाई 2026 में सेवा क्षेत्र का कुल प्रदर्शन काफी हद तक सकारात्मक रहा है।

  • सकारात्मक विकास वाले क्षेत्र: कुल 19 में से 17 उप-क्षेत्रों ने सालाना आधार पर बढ़त दर्ज की है।
  • दोहरे अंकों की ग्रोथ वाले क्षेत्र: कुल 10 उप-क्षेत्रों ने 10 प्रतिशत से अधिक यानी दोहरे अंकों में वृद्धि हासिल की है।
  • गिरावट दर्ज करने वाले क्षेत्र: केवल 2 उप-क्षेत्र ऐसे रहे जिनमें सालाना आधार पर संकुचन देखा गया।

किन क्षेत्रों में दर्ज की गई सबसे तेज ग्रोथ और कहां दिखा दबाव?

इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जुलाई 2026 के दौरान प्रशासनिक सेवाओं, खुदरा व्यापार और रियल एस्टेट सेक्टर ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वहीं दूसरी ओर, एयर ट्रांसपोर्ट और रिपेयर सर्विसेज में गिरावट दर्ज की गई है।

सबसे तेज बढ़त हासिल करने वाले प्रमुख उप-क्षेत्र:

प्रशासनिक और सहायता सेवाएं: इस उप-क्षेत्र ने 20.9 प्रतिशत की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की है।

  • खुदरा व्यापार: खुदरा व्यापार में 18.5 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी देखी गई है।
  • रियल एस्टेट: रियल एस्टेट सेक्टर ने 14.4 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की है।
  • रहने व खाने की सुविधाएं: इस क्षेत्र में 12.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है।
  • बैंकिंग: बैंकिंग उप-क्षेत्र ने 12.3 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है।

दबाव का सामना करने वाले उप-क्षेत्र: 

जुलाई 2026 के दौरान केवल दो उप-क्षेत्रों में ही सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई।

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हवाई परिवहन: एयर ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में 8.4 प्रतिशत की गिरावट आई है।
मरम्मत सेवाएं: रिपेयर सर्विसेज के कारोबार में 5.0 प्रतिशत का संकुचन दर्ज किया गया है।

इस प्रायोगिक इंडेक्स को जारी करने के पीछे MoSPI का क्या उद्देश्य है?

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) इन मासिक सेवा उत्पादन सूचकांकों (आईएसपी) को प्रायोगिक आधार पर प्रकाशित कर रहा है। मंत्रालय ने अप्रैल 2026 का पहला ट्रायल सर्विस प्रोडक्शन इंडेक्स 14 जुलाई 2026 को जारी किया था।

मंत्रालय के अनुसार, इस ट्रायल सीरीज के प्रकाशन का मुख्य उद्देश्य आंकड़ों की गुणवत्ता की जांच करना, इसकी मजबूती का परीक्षण करना और हितधारकों व उपयोगकर्ताओं से प्रतिक्रिया प्राप्त करना है। इससे भविष्य में आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता में सुधार करने में मदद मिलेगी।

किन क्षेत्रों के आंकड़ों में बाद में किया जा सकता है संशोधन?

मंत्रालय ने अपनी विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ प्रमुख उप-क्षेत्रों के आंकड़े शुरुआती और प्रोविजनल डेटा पर आधारित हैं। 

  • प्रोविजनल डेटा वाले क्षेत्र: रेलवे, बैंकिंग और बीमा उप-क्षेत्रों के सूचकांक अनंतिम मासिक आंकड़ों पर आधारित हैं।
  • वार्षिक संशोधन: इन तीनों उप-क्षेत्रों (रेलवे, बैंकिंग और बीमा) के सूचकांकों में वार्षिक आधार पर संशोधन किया जाएगा।

जुलाई 2026 के इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि देश के सेवा क्षेत्र के बड़े हिस्से में मजबूत रफ्तार बनी हुई है। जहां 19 में से 17 क्षेत्रों में ग्रोथ दर्ज होना और 10 क्षेत्रों का दोहरे अंकों में बढ़ना आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को दिखाता है, वहीं एयर ट्रांसपोर्ट व रिपेयर सेवाओं में गिरावट विशिष्ट क्षेत्रों के दबाव की ओर संकेत करती है। प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई यह इंडेक्स श्रृंखला आने वाले समय में हितधारकों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर और अधिक परिपक्व एवं सटीक होगी।

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