देश में सतत विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मानव संसाधन क्षेत्र में निवेश की भी जरूरत है। ये सुझाव शुक्रवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण में दिया गया। इसके अनुसार, जनसांख्यिकी लाभांश को पाने के लिए सरकार शिक्षा और कौशल विकास को सुधारने और सभी को रोजगार एवं सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं देने को प्रतिबद्ध है। समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया कि संपर्क सुधारने, आवास मुहैया कराने और सामजिक-आर्थिक संकेतकों में लैंगिक अंतर को कम करने की जरूरत है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत जैसे विकासशील देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और संपर्क जैसी सामाजिक अवसंरचना में सार्वजनिक निवेश समावेशी विकास सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है। इसमें कहा गया कि ‘एजेंडा-2030’ में तय 17 सतत विकास लक्ष्यों और 169 कार्य सामाजिक अवसंरचना से करीब से जुड़े हैं। सतत विकास लक्ष्य में निहित शिक्षा और स्वास्थ्य को रेखांकित करते हुए कहा गया कि मानव विकास सूचकांक इससे जुड़ा हुआ है और इसका सबूत राज्यों के सतत विकास लक्ष्य रैंकिंग और मानव विकास सूचकांक में देखा जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक सतत विकास के लिए तय ‘एजेंडा-2030’ के तहत दुनिया में शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान और भविष्य में वैश्विक साझेदारी का आह्वान किया गया है। समीक्षा में कहा गया कि गरीबी उन्मूलन और अन्य अभाव को दूर करने के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षा को सुधारने की रणनीति, असमानता को कम करने एवं टिकाऊ आर्थिक विकास भी होना चाहिए।
समीक्षा के मुताबिक भारत सतत विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है और इन्हें हासिल करने के लिए मजबूत सामाजिक अवसंरचना की जरूरत है। इसलिए सरकार विद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थाओं, अस्पतालों, स्वच्छता तक पहुंच, जलापूर्ति, सड़क संपर्क, सस्ते मकान, कौशल और जीविकोपार्जन के मौके मुहैया कराने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि इन सुविधाओं का विकास अहम है क्योंकि भारत में दुनिया की सर्वाधिक युवा आबादी रहती है और इसकी आधी आबादी 25 साल से कम उम्र की है।