पिछले साल राहुल अपने परिवार के साथ शिमला गए थे। अचानक उनके पिता को सीने में तेज दर्द उठा। अनजान शहर और अचानक अस्पताल का खर्च। सारी यात्रा का मजा खराब हो गया। कई लोगों को लगता है कि ट्रैवल इंश्योरेंस केवल विदेश जाने वालों के लिए होता है या फिर वीजा की औपचारिकता भर है।
यात्रा के दौरान कई ऐसे छिपे हुए जोखिम होते हैं, जिनकी हम कल्पना भी नहीं करते। होटल और फ्लाइट की एडवांस बुकिंग का पैसा फंस जाना, चेक-इन बैगेज का देर से मिलना, पासपोर्ट खो जाना या प्राकृतिक आपदा के कारण ट्रिप बीच में रोकना, इन सभी परिस्थितियों में खर्च तेजी से बढ़ सकता है। उपयुक्त यात्रा बीमा पॉलिसी की शर्तों और सीमाओं के तहत ऐसी आपात स्थितियों में आर्थिक और सहायता सुरक्षा प्रदान करती है।
मुश्किल वक्त में सबसे पहले इलाज व सुरक्षा को प्राथमिकता दें। इसके साथ ही बीमा कंपनी को तय समय के भीतर सूचना दें। पॉलिसी नंबर और हेल्पलाइन नंबर हमेशा अपने और परिवार के पास रखें। फ्लाइट में देरी या सामान खोने पर एयरलाइन से लिखित प्रमाण लें। डॉक्टर के पर्चे, अस्पताल के बिल, बोर्डिंग पास और सभी रसीदें संभालकर रखें।
भारत में लोग रेल, बस, कार और विमान से लगातार सफर करते हैं। तीर्थयात्रा हो, फैमिली वेकेशन हो या बिजनेस ट्रिप, हम अक्सर यह मान लेते हैं कि अपने ही देश में हैं, तो सब संभाल लेंगे। यही गलतफहमी बीमा को नजरअंदाज करवाती है।
दूरदराज के किसी इलाके में स्वास्थ्य आपातकाल या सामान चोरी जैसी घटनाएं वास्तविक नुकसान पहुंचाती हैं। कुछ घरेलू पॉलिसियां भी दुर्घटना, मेडिकल खर्च और ट्रिप कैंसिलेशन को कवर करती हैं। इसलिए अपने सफर के तरीके के अनुसार सही कवर चुनना बुद्धिमानी है।
यात्रा पर निकलने से पहले केवल पांच मिनट निकालकर अपनी पॉलिसी के दस्तावेज, नाम, गंतव्य, बीमा राशि और अपवादों की जांच अवश्य कर लें। आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर अपने फोन में सेव करें और परिवार के सदस्यों के साथ साझा करें। ये पांच मिनट मुश्किल समय में बड़ा खर्च बचा सकते हैं।
यात्रा बीमा खरीदते समय केवल सबसे कम प्रीमियम की तुलना करना नासमझी है। पॉलिसी चुनते समय कुछ अहम बातों का ध्यान रखें: