घरेलू बाजार में चांदी 8,300 रुपये टूटकर 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। सोने के भाव में भी 1,300 रुपये की गिरावट आई है। केंद्रीय बैंकों के सख्त रुख और कमजोर मांग के बीच क्या कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव बना रहेगा? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
वैश्विक बाजारों में आई तेज गिरावट के चलते घरेलू सराफा बाजार में शुक्रवार को कीमती धातुओं में तेज बिकवाली हुई। राष्ट्रीय राजधानी में चांदी की कीमतों में 8,300 रुपये की गिरावट आई और यह 1.90 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। यह चांदी का पिछले लगभग 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले चांदी को इस स्तर पर 10 दिसंबर 2025 को देखा गया था, जब इसका भाव 1.92 लाख रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था।
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उधर, सोने के भाव में भी कमजोरी देखी गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,300 रुपये टूटकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में सोना 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।
अखिल भारतीय सराफा संघ के अनुसार, चांदी पिछले कारोबारी सत्र में मामूली बढ़त के बाद सीधे औंधे मुंह गिरी। बृहस्पतिवार को चांदी 1,98,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी, जहां से यह 8,300 रुपये टूटकर 1,90,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
केंद्रीय बैंकों का आक्रामक रुख धातुओं पर भारी
जेनर मेटल्स के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ धातु रणनीतिकार पीटर ग्रांट ने कहा, महंगाई को लेकर लगातार बनी चिंताओं के कारण कई केंद्रीय बैंकों अभी भी आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।
भले ही इस हफ्ते प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने दरों को स्थिर रखा हो, लेकिन संकेत यही था कि लंबे समय तक ऊंची दरों का रुख हावी है और यही बात कीमती धातुओं पर भारी पड़ रही है।
इस हफ्ते प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने दरों में बढ़ोतरी पर रोक लगा दी, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि कसने का चक्र अभी खत्म नहीं हुआ है।
निवेशकों के लिए चिंताः निवेशकों के लिए एक नई चिंता उभर रही है क्योंकि बाजार के 2027 में घाटे से उबरकर अधिशेष में जाने का अनुमान है। बढ़ते स्टॉक, कमजोर आभूषण मांग और सुस्त औद्योगिक खपत कीमत में तेजी को सीमित कर सकती है।