जब कोई आईपीओ शेयर बाजार में धमाकेदार मुनाफे के साथ लिस्ट होता है, तो ठीक 30 से 35 दिनों के भीतर अचानक उसमें तेज गिरावट आने लगती है। छोटे और खुदरा निवेशक अक्सर इसको देखकर घबरा जाते हैं और समझ नहीं पाते कि जिस शेयर में पहले दिन जबरदस्त खरीदारी थी, वह अचानक औंधे मुंह क्यों गिरने लगा।
निवेशकों के लिए सबक...
किसी आईपीओ में बड़े निवेशकों का नाम देखकर यह न मान लें कि वे लंबे समय तक शेयर रोकेंगे। लिस्टिंग होने के महीने भर बाद सतर्क हो जाएं। यदि आप खुले बाजार से शेयर खरीद रहे हैं, तो 30 दिन की लॉक-इन अवधि खत्म होने का इंतजार करें। इस दौरान शेवर डिस्काउंट या बेहतर भाव पर मिल सकता है। कंपनी का कारोबार मजबूत है, तो अल्पकालिक दबाव से घबराने की जरूरत नहीं है।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
सेबी के मुताबिक, पहली अनलॉक अवधि में शेयर बेचने वालों में सबसे आगे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक रहे। इन्होंने अपने आवंटन का अनलॉक खुलते ही बेच डाला। करीब 24.5 फीसदी हिस्सा