नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस को अक्सर टैक्स बचाने वाले निवेश के तौर पर देखा जाता है। कई लोगों को लगता है कि अगर तत्काल मिलने वाली टैक्स छूट बहुत बड़ी नहीं है तो एनपीएस में पैसा लगाने का कोई खास फायदा नहीं है। लेकिन रिटायरमेंट के लिए किसी निवेश को केवल इस आधार पर देखना सही नहीं है कि निवेश करते समय कितनी टैक्स छूट मिल रही है। असल सवाल यह है कि अगले 25 या 30 वर्षों में वह निवेश आपके लिए कितनी कुशलता से संपत्ति बनाने में मदद करता है। एनपीएस की खासियत यही है कि इसमें निवेश के अलग-अलग चरणों में टैक्स से जुड़े फायदे मिलते हैं।
एनपीएस में कर्मचारी का योगदान आयकर की धारा 80C के तहत उपलब्ध 1.5 लाख रुपये की कुल सीमा के भीतर कटौती के लिए पात्र है। इसके अलावा 80C की सीमा से ऊपर कर्मचारी के एनपीएस योगदान पर 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कटौती का लाभ मिलता है। यानी पात्रता के अनुसार एनपीएस के जरिए कर्मचारी अपनी कर योग्य आय को और कम कर सकता है। इसके साथ ही नियोक्ता की ओर से एनपीएस में किया गया योगदान भी तय सीमा तक कटौती के लिए पात्र होता है। पुरानी कर व्यवस्था में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत, जबकि नई कर व्यवस्था में यही सीमा 14 प्रतिशत बताई गई है।
एनपीएस का दूसरा बड़ा फायदा निवेश के दौरान पोर्टफोलियो को बदलने से जुड़ा है। इक्विटी और डेट में निवेश के अनुपात को समय-समय पर बदलने की प्रक्रिया को पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग कहा जाता है। एनपीएस में नियमों के तहत इस तरह के बदलाव पर कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं लगता है। यानी निवेशक अपनी जरूरत और बाजार की स्थिति के अनुसार इक्विटी और डेट के बीच बदलाव कर सकता है, बिना इसे सामान्य तौर पर अलग से कर योग्य घटना बनाए। इसी तरह पेंशन फंड मैनेजर बदलने पर भी इन प्रबंधन फैसलों को कर योग्य घटना नहीं माना जाता है। इससे लंबे समय के निवेश में पोर्टफोलियो को व्यवस्थित करना आसान हो सकता है।
एनपीएस का तीसरा फायदा रिटायरमेंट के समय मिलने वाली रकम से जुड़ा है। दिए गए विवरण के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत गैर-सरकारी निवेशक कुल जमा राशि का 80 प्रतिशत तक टैक्स-फ्री एकमुश्त निकाल सकते हैं। बाकी राशि का इस्तेमाल आमतौर पर एन्युटी खरीदने के लिए किया जाता है और एन्युटी की खरीद को भी लागू व्यवस्था के तहत अनुकूल टैक्स लाभ मिलता है। इस तरह एनपीएस में निवेश करने वाले व्यक्ति को केवल पैसा जमा करते समय ही टैक्स लाभ नहीं मिलता, बल्कि रिटायरमेंट के समय रकम निकालते हुए भी टैक्स से जुड़ी राहत का फायदा मिल सकता है।
एनपीएस को समझने का सबसे अहम तरीका यही है कि इसे केवल आज की टैक्स बचत के नजरिए से न देखा जाए। रिटायरमेंट के लिए लंबे समय तक निवेश करने में पैसा कितनी कुशलता से बढ़ता है, पोर्टफोलियो में बदलाव पर कितना टैक्स लगता है और अंत में रकम निकालने पर क्या टैक्स व्यवस्था रहती है, ये सभी बातें महत्वपूर्ण हैं। एनपीएस में बताए गए तीन टैक्स फायदे इन तीनों चरणों को जोड़ते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति के लिए एनपीएस कितना उपयोगी होगा, यह उसकी आय, कर व्यवस्था, निवेश अवधि, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट लक्ष्य पर निर्भर करेगा।