देश की प्रमुख मालवहन कंपनियों ने भारतीय रेलवे में माल ढुलाई को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। दिल्ली के स्कोप कॉम्प्लेक्स में सेंटर फॉर ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड मैनेजमेंट (सीटीआरएएम) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मालवहन संगोष्ठी में यह मांग उठी। कंपनियों ने मौजूदा नीति में माल और पार्सल वैगन निवेश को मंजूरी देने की बात कही। संगोष्ठी का विषय ‘सिनर्जी ऑन ट्रैक : ट्रांसफार्मिंग इंडियाज लॉजिस्टिक्स-रेल एक्सप्रेस रिवॉल्यूशन’ था।
कॉनकॉर के अंतरराष्ट्रीय बाजार एवं संचालन के निदेशक विजय कुमार सिंह ने आधुनिक मशीनें और एक साथ अधिक सामान लोड करने तथा उतारने वाली प्रणालियां लाने की बात कही। उन्होंने लौह अयस्क की ढुलाई के लिए नए बीओबीएनएस वैगन खरीदने की अनुमति देने की मांग भी उठाई। टाटा इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स के प्रभात कुमार, डीपी वर्ल्ड रेल के मुख्य परिचालन अधिकारी महेंद्र बिरहाड़े और डीटीडीसी के मुख्य वित्तीय अधिकारी अनील गंभीर ने भी सुझाव दिए।
विश्व बैंक एवं एडीबी सलाहकार सचिन भनुशाली, अमेजन इंडिया के कर्नल वीरेश शर्मा और ब्लू डार्ट के मुख्य परिचालन अधिकारी विक्रम मंसुखानी ने भी मालवहन संबंधी विचार साझा किए। इन सुझावों का उद्देश्य भारतीय रेलवे की माल ढुलाई दक्षता को बढ़ाना है।
भारतीय रेलवे के कार्यकारी निदेशक माल ढुलाई एमएस बाजवा ने कहा कि मालवहन कंपनियों द्वारा दिए गए सुझावों को रेलवे ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नीति बनाते समय इन सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा। इस संगोष्ठी में रेलवे बोर्ड के सदस्य संचालन एवं व्यापार डॉ. मनोज सिंह भी उपस्थित रहे। अपर सदस्य यातायात देवेन्द्र कुमार और सीटीआरएएम के कार्यकारी निदेशक अमित कुमार सिंह भी मौजूद थे। रेलवे का यह रुख दर्शाता है कि वह मालवहन क्षेत्र में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।
निजी निवेश से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। समर्पित गलियारों में माल और पार्सल वैगन की उपलब्धता से समय की बचत होगी। इससे मालवहन की लागत भी कम होगी और दक्षता बढ़ेगी। कम दूरी के परिवहन में लागत समानता आने से सड़क पर निर्भरता घटेगी। आधुनिक मशीनों और प्रणालियों से लोडिंग-अनलोडिंग प्रक्रिया तेज होगी। यह समग्र भारतीय मालवहन प्रणाली को मजबूत करेगा।