बढ़ती महंगाई के इस दौर में यदि वृद्धावस्था की आर्थिक सुरक्षा पक्की करनी है, तो समय-आधारित बकेट स्ट्रेटजी, सही एसेट एलोकेशन और सूझबूझ के साथ निकासी नियमों का पालन करना अनिवार्य शर्त है। जीवन के हर पड़ाव पर कमाई की दौड़ के बाद जब व्यक्ति रिटायरमेंट की दहलीज पर पहुंचता है, तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल होता है- क्या जीवनभर की जमापूंजी परिवार को सुरक्षित रख पाएगी? जीएमआई इंडिया रिटायरमेंट रिसर्च रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, भारत में केवल 37% लोगों के पास ही रिटायरमेंट प्लान है। आधे से भी कम लोगों को यह पता है कि उन्हें रिटायरमेंट के लिए कितने पैसों की आवश्यकता होगी।
सही एसेट एलोकेशन और प्रोडक्ट्स का चुनाव जरूरी
| बकेट | समय सीमा | अनुशंसित निवेश विकल्प | मुख्य उद्देश्य और कार्य |
|---|---|---|---|
| पहली बकेट (तत्काल खर्च के लिए) | रिटायरमेंट के शुरुआती तीन से पांच वर्ष | सुरक्षित उपकरण जैसे शॉर्ट-टर्म डेट या कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड | मासिक खर्चों को पूरा करना और जोखिम को न्यूनतम करना। |
| दूसरी बकेट (मध्यम अवधि के लिए) | लगभग 8 से 15 वर्ष | मध्यम अवधि के डेट और इक्विटी का मिश्रण | मध्यम अवधि की जरूरतों को पूरा करना व महंगाई के साथ तालमेल बिठाते हुए पैसे को बढ़ाना। |
| तीसरी बकेट (दीर्घकालिक विकास के लिए) | रिटायरमेंट के 15 साल बाद से निकासी | इक्विटी जैसी उच्च विकास क्षमता वाली संपत्तियां | शेयर बाजार के रिटर्न के दम पर फंड को महंगाई से ज्यादा तेजी से बढ़ाना। |
अनुशासन और सही आवंटन है कुंजी
रिटायरमेंट का मतलब केवल काम बंद करना नहीं है, बल्कि एक ऐसी सुनहरी मंजिल की ओर बढ़ना है, जहां वित्तीय अनुशासन, सही एसेट एलोकेशन और एक सही सलाहकार की मदद से बनाई गई कस्टमाइज्ड निकासी योजना आपके बुढ़ापे को पूरी तरह चिंतामुक्त बना सकती है।
इन गलतियों से रिटायर लोगों को बचना चाहिए
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क्या आपकी रिटायरमेंट स्ट्रेटजी भविष्य के लिए तैयार है?
बढ़ती महंगाई और लंबी होती उम्र के इस दौर में आपका रिटायरमेंट फंड कब तक साथ देगा? क्या आपकी 3-बकेट स्ट्रेटजी और एसेट एलोकेशन का गणित सही है? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए स्कैन करें।