अल-नीनो के खतरे के कारण घरेलू उत्पादन में गिरावट की चिंताओं के बीच दालों के घटते आयात ने महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ा दिया है। इतना ही नहीं निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने 70 फीसदी सूखे की आशंका जताई है, जो व्यापारियों के साथ ही साथ उपभोक्ताओं के लिए भी चिंताजनक है। हालांकि सरकार का कहना है कि दालों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के कारण घबराने की आवश्यकता नहीं है।
मुख्य चिंता पैदावार से जुड़ी
खरीफ दालों की बुवाई 108 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो अच्छी रिकवरी दर्शाती है। हालांकि, मुख्य चिंता प्रति हेक्टेयर पैदावार को लेकर है। दालों की फसल को बीच के चरण में अच्छी बारिश की जरूरत होती है। अगस्त के अंत से सितंबर तक अल नीनो के मजबूत होने के संकेत हैं, जिसका सीधा नकारात्मक असर दालों की उत्पादकता पर पड़ सकता है।
कीमतों पर पड़ रहा असर
कुंवर जी ग्रुप के डायरेक्टर व हेड ऑफ रिसर्च रवि देवड़ा का कहना है कि हाल के दिनों में चना 6,100 से बढ़कर 6,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। उड़द और तुअर की कीमतें भी बढ़ी हैं, लेकिन ऊंचे आयात के कारण तुअर की कीमतों में एक सीमा तक ठहराव देखा गया। त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ेगी। जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं।
महंगाई पर लगाम लगाने की तैयारी
केंद्र सरकार आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए दालों की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है। सरकार ने लगभग 30 लाख टन दालों का बफर स्टॉक तैयार किया है। जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक से बाजार में दालों की आपूर्ति की जाएगी। इस बफर स्टॉक में अरहर, उड़द, मूंग, चना और मसूर शामिल हैं। सरकार बाजार की कीमतों पर लगातार नजर रखे हुए है। जैसे ही कीमतों में असामान्य तेजी दिखेगी, तय अंतराल और योजनाबद्ध तरीके से दालों को बाजार में उतारा जाएगा।