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डिजिटल भुगतान के साथ बढ़ी धोखाधड़ी: एक खाते में न रखें सारी जमा पूंजी; कैसे बचाएं अपना पैसा?

Mon, 31 Aug 2026 08:12 AM IST
निर्मल कांत कपिल मखीजा, फाउंडर, मिनईएमआई

सार

डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ यूपीआई फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। एक ही खाते में बचत और रोजमर्रा के खर्च का पैसा रखना जोखिम बढ़ाता है। ऐसे में अलग खर्च खाता रखना कितना सुरक्षित रहेगा?

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यूपीआई के दौर में खर्च और बचत खाता अलग करना जरूरी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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भारत में डिजिटल क्रांति ने लेनदेन की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। जेब में नकदी की जगह अब स्मार्टफोन और क्यूआर कोड ने ले ली है। लेकिन इस अभूतपूर्व सुविधा के साथ एक कड़वी हकीकत यह भी है कि साइबर अपराधियों के लिए हमलों का दायरा पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
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धोखाधड़ी से जुड़े आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को साफ उजागर करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से नवंबर के बीच यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिये 805 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 10.64 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए। ये आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि चूक तकनीकी से ज्यादा हमारे वित्तीय प्रबंधन और लापरवाही के स्तर पर हो रही है।
 
खर्च खाता और बचत खाता अलग करना क्यों जरूरी?
आज सबसे बड़ी गलती यह हो रही है कि आम नागरिक एक ही बैंक खाते में सैलरी ले रहा है, उसी में जीवनभर की गाढ़ी कमाई व इमरजेंसी फंड रख रहा है और उसी खाते को यूपीआई से जोड़कर हर जगह भुगतान कर रहा है।
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डिजिटल युग में वित्तीय सुरक्षा की पहली सीढ़ी है, अपने पैसों के बीच एक मजबूत सुरक्षा दीवार खड़ी करना। यदि आपका मुख्य बचत खाता सीधे यूपीआई से जुड़ा है, तो किसी फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल या अनधिकृत ट्रांजैक्शन की स्थिति में पूरा खाता खाली हो सकता है। अगर आप यूपीआई के लिए केवल एक अलग खाता (ट्रांजैक्शन/खर्च खाता) रखते हैं और उसमें केवल 5,000 से 10,000 रुपये का बैलेंस रहता है, तो किसी भी अनहोनी की स्थिति में आपका नुकसान बेहद सीमित रहेगा।
  • जब एक ही खाते में लाखों रुपये दिखते हैं, तो छोटे-छोटे डिजिटल भुगतानों का एहसास नहीं होता और फिजूलखर्ची बढ़ जाती है। अलग खाते में महीने का निश्चित बजट रखने से बैलेंस खत्म होते ही खर्च की सीमा का तुरंत आभास हो जाता है।
  • ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, बीमा या यूटिलिटी बिलों के ऑटो-डेबिट मैंडेट्स अक्सर मुख्य खाते में दब जाते हैं। खर्च वाले खाते से जुड़े होने पर आप आसानी से ट्रैक कर सकते हैं कि कौन-सा सब्सक्रिप्शन जारी रखना है और किसे बंद करना है।

कैसे बनाएं दो खातों वाला सुरक्षित मॉडल?
खाते का प्रकार मुख्य उद्देश्य सुरक्षा नियम
मुख्य खाता इमरजेंसी फंड, दीर्घकालिक बचत, निवेश, एफडी • किसी भी UPI ऐप से लिंक न करें• इसका डेबिट कार्ड जेब में न रखें• केवल सुरक्षित नेट बैंकिंग से नियंत्रित करें
खर्च खाता दैनिक खरीदारी, बिल भुगतान, ऑनलाइन ऑर्डर, ऑटोपे • UPI ऐप्स से जोड़ें• बैलेंस ₹5,000 से ₹10,000 रखें• जरूरत पड़ने पर ही मुख्य खाते से इसमें फंड डालें

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जानना जरूरी है

डिजिटल सुरक्षा के 10 गोल्डन नियम
1. किसी से पैसे लेने के लिए कभी यूपीआई पिन दर्ज नहीं करना पड़ता। पिन केवल पैसे भेजने के लिए इस्तेमाल होता है।
2. बचत खाते को डिजिटल भुगतान एप्स से पूरी तरह दूर रखें।
3. बैंक अधिकारी, पुलिस या कस्टमर केयर बनकर फोन करने वाले किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, पासवर्ड या सीवीवी कभी न बताएं।
4. लॉटरी जीतने, कैशबैक मिलने या पुराना सामान खरीदने/बेचने के नाम पर भेजे गए किसी भी अनजान क्यूआर कोड को स्कैन न करें।
5. किसी के कहने पर एनीडेस्क जैसी स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स और व्हाट्सएप पर आई किसी अनजान एपीके फाइल को इंस्टॉल न करें।
6. यूपीआई एप पर पे बटन दबाने से पहले स्क्रीन पर दिख रहे मर्चेंट/प्राप्तकर्ता के नाम और राशि की पुष्टि जरूर करें।
7. बैंकिंग और पेमेंट ऐप्स हमेशा गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड-अपडेट करें।
8. महीने में एक बार अपनी यूपीआई एप की सेटिंग्स में जाकर ऑटोपे या मैंडेट्स सेक्शन देखें। गैर-जरूरी ऑटो-डेबिट को तुरंत कैंसिल करें।
9. रेलवे स्टेशन, होटल या कैफे के पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क से जुड़कर कभी भी बैंकिंग एप या यूपीआई का इस्तेमाल न करें।
10. अनधिकृत लेनदेन होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें, cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें और अपने बैंक को सूचित कर खाता तुरंत ब्लॉक करवाएं।
 
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