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सुविधा: साल के अंत तक देश के 400 टोल प्लाजा बनेंगे बैरियर मुक्त, लागू होगा एमएलएफएफ सिस्टम

Tue, 27 Oct 2026 05:06 PM IST
द बोनस बोनस डेस्क, नई दिल्ली

सार

  • सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इस साल के अंत तक देश के करीब 400 टोल प्लाजा पर मल्टी लेन फ्री फ्लो सिस्टम लागू करने जा रहा है।
  • इस नई तकनीक से टोल प्लाजा पर गाड़ियों का इंतजार करने का समय शून्य हो जाएगा और टोल अपने आप कट जाएगा।
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UP toll plaza rates - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अगर आप भी हाईवे पर सफर के दौरान टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी लाइनों और समय की बर्बादी से परेशान हैं, तो आपके लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देश में टोल व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर चुका है। इस साल के अंत तक देश के लगभग 400 टोल प्लाजा पर वाहन चालकों को टोल चुकाने के लिए रुकने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ेगी। आपकी गाड़ी बिना रुके सरपट निकल जाएगी और टोल टैक्स खुद-ब-खुद कट जाएगा।

क्या है एमएलएफएफ सिस्टम और यह कैसे काम करेगा?

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य टोल प्लाजा पर वेटिंग टाइम को पूरी तरह शून्य करना है। इसके लिए मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) सिस्टम लागू किया जा रहा है। इस तकनीक के तहत हाईवे पर कोई भी फिजिकल बैरियर या रोकने के लिए रुकावट नहीं होगी। गाड़ियां अपनी रफ्तार से चलती रहेंगी और हाई-स्पीड कैमरे तथा आरएफआईडी रीडर फास्टैग या नंबर प्लेट के जरिए वाहनों की पहचान कर स्वतः टोल राशि काट लेंगे।

मौजूदा स्थिति और आगे की योजना

  • देश के चुनिंदा 6 टोल प्लाजा पर एमएलएफएफ सिस्टम की शुरुआत पहले ही की जा चुकी है।
  • इनकी सफलता को देखते हुए 104 और टोल प्लाजा के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं।
  • इस साल के अंत तक बचे हुए करीब 290 और टोल प्लाजा पर यह प्रणाली लागू कर दी जाएगी। 

1,150 टोल प्लाजा हैं देश में 

पूरे देश में एक्सप्रेसवे, एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे और राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल 1.5 लाख किलोमीटर से अधिक लंबा है, जिन पर एनएचएआई के करीब 1,150 टोल प्लाजा संचालित होते हैं। वर्तमान में इन सभी माध्यमों से सालाना 83,000 करोड़ रुपये से अधिक का टोल टैक्स वसूला जाता है।

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सरकार का यह भी मानना है कि इस नई व्यवस्था से 100 फीसदी सटीक टोल वसूली सुनिश्चित की जा सकेगी। मौजूदा समय में लोकल प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार के विभिन्न महकमों के कई वाहन बिना टोल दिए गुजर जाते हैं, जिससे राजस्व को नुकसान होता है। नई तकनीक आने से इन सभी कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी और समय व ईंधन दोनों की बचत होगी।

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