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होर्मुज जलडमरूमध्य पर कानूनी टकराव: अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री नियमों पर फंसा पेंच, तेल आपूर्ति संकट कायम

Wed, 15 Apr 2026 11:20 AM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री कानूनों (UNCLOS) के टकराव और इसके व्यापारिक असर के बारे में पढ़ें। जानिए इस तनाव से वैश्विक व्यापार पर क्या असर होगा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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वैश्विक तेल आपूर्ति के 20 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि गहरे कानूनी विवादों में भी उलझा हुआ है। दोनों देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के संचालन के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला दे रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र में माल ढुलाई और कच्चे तेल के व्यापार पर अनिश्चितता काफी बढ़ गई है।

कानूनी व्याख्याओं की अलग-अलग दुनिया

समुद्री कानून के विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान दोनों ही 'लॉ ऑफ द सी' (समुद्री कानून) के मामले में दो अलग-अलग वैचारिक दुनिया में जी रहे हैं। वाशिंगटन होर्मुज को पूरी तरह से एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानता है, जबकि तेहरान इसे अपने क्षेत्रीय जल (territorial waters) का हिस्सा मानता है। इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ईरान द्वारा टोल वसूलने को अमेरिका अवैध मानता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई नाकेबंदी को ईरान अपनी संप्रभुता का 'गंभीर उल्लंघन' बता रहा है।

UNCLOS समझौते का अभाव और नियमों की कमी

विवाद की मुख्य जड़ 1982 में तैयार और 1994 में लागू हुई 'संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि' (UNCLOS) से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के लिए सुचारू नियम तय करना था। दिलचस्प बात यह है कि 171 देशों और यूरोपीय संघ द्वारा इस संधि को लागू किए जाने के बावजूद, अमेरिका और ईरान दोनों ने ही अब तक इसे औपचारिक रूप से लागू (ratify) नहीं किया है। इसके चलते युद्ध के इस मौजूदा माहौल में दोनों देशों के बीच ऐसा कोई सर्वमान्य नियम नहीं है जिसके आधार पर विवाद को सुलझाया जा सके।

'इनोसेंट पैसेज' बनाम 'ट्रांजिट पैसेज' का संघर्ष

ईरान पुराने अंतरराष्ट्रीय मानकों (जैसे 1958 टेरिटोरियल सीज कन्वेंशन) का हवाला देते हुए विदेशी जहाजों को केवल 'इनोसेंट पैसेज' (शांतिपूर्ण मार्ग) का अधिकार देता है। इसके तहत विदेशी जहाज बिना किसी सुरक्षा को नुकसान पहुंचाए गुजर सकते हैं, लेकिन ईरान मानता है कि वह अपने क्षेत्रीय जल में इस मार्ग को निलंबित कर सकता है। 
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इसके विपरीत, अमेरिका UNCLOS के नए नियमों के तहत 'ट्रांजिट पैसेज' की मांग करता है। यह नियम तटीय देशों के नियंत्रण को सीमित करता है और निर्बाध नौवहन, विमानों की उड़ान और पनडुब्बियों की आवाजाही सुनिश्चित करता है। अमेरिका अपने इस रुख को 'फ्रीडम ऑफ नेविगेशन' गश्त के जरिए नियमित रूप से लागू करने की कोशिश करता है और ईरान के दावों को खारिज करता है। वहीं, तेहरान का तर्क है कि वह शुरुआत से ही इन नए नियमों का विरोध करता आया है, इसलिए उस पर ये नियम लागू नहीं होते।

आगे का रास्ता और व्यापारिक दृष्टिकोण

होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूदा सैन्य स्थिति और आर्थिक व्यवधान इस जटिल कानूनी लड़ाई का ही एक हिस्सा हैं। जब तक दोनों देश किसी साझा कानूनी ढांचे पर सहमत नहीं होते और उसका पालन करने की प्रतिबद्धता नहीं दिखाते, तब तक इस जलमार्ग की स्थिति अस्थिर बनी रहेगी। इस कानूनी गतिरोध के लंबे खिंचने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल की सुचारू आपूर्ति पर पड़ेगा।
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