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West Asia: कच्चे तेल और सब्सिडी के भारी बोझ के बावजूद नहीं थमी रफ्तार, जानिए कैसे मजबूत है भारतीय अर्थव्यवस्था

Tue, 09 Jun 2026 05:38 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने क्या चुनौतियां हैं? कच्चे तेल और उर्वरकों के भारी बिल के बावजूद देश की वृद्धि दर घरेलू खपत के मजबूत रहने से जुड़ी रिपोर्ट यहां पढ़ें।
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भारतीय अर्थव्यवस्था - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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दुनियाभर में, खास तौर पर पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं। लेकिन इन बाहरी चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था एक मजबूत दीवार की तरह खड़ी है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट के कारण बाहरी चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन देश की घरेलू खपत अब भी बेहद मजबूत बनी हुई है। सरकार से जुड़े सूत्रों ने भी इसकी पुष्टी की है। 

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आइए आसान भाषा में समझते हैं कि वैश्विक संकट और महंगे आयात के बीच भारत की अर्थव्यवस्था कैसे काम कर रही है और सरकार की आगे की रणनीति क्या है।

बाहरी चुनौतियों से देश की अर्थव्यवस्था पर क्या दबाव पड़ रहा है?

केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया के संकट के कारण भारत के सामने मुख्य रूप से कच्चे तेल और फर्टिलाइजर के महंगे आयात की बाहरी चुनौती खड़ी हो गई है। इसका सीधा असर ईंधन बाजार पर पड़ रहा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ज्यादा होने के बावजूद देश में तेल कंपनियों को काफी कम कीमत पर ईंधन बेचना पड़ रहा है, जिसके कारण उन्हें हर दिन करीब 650 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

क्या इन बाहरी संकटों से देश की आर्थिक ग्रोथ पर कोई खतरा है?

राहत की बात यह है कि इन तमाम बाहरी चुनौतियों के बावजूद देश की आर्थिक विकास दर पर कोई दबाव या तनाव नहीं है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष की मार्च तिमाही में विकास की जो रफ्तार दिखी थी, वह चालू वित्त वर्ष (FY27) की पहली तिमाही में भी पूरी तरह बरकरार है। इसके अलावा, विदेशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे पर भी अब तक कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है।

बढ़ते खर्च और सब्सिडी के बोझ से कैसे निपट रही है सरकार?

महंगाई को कंट्रोल करने और महत्वपूर्ण सेक्टर्स को राहत देने के लिए सरकार बड़े कदम उठा रही है। इसके तहत दो प्रमुख फैसले सामने आए हैं:

  • फर्टिलाइजर सब्सिडी की मांग: फर्टिलाइजर मंत्री ने वित्त मंत्रालय से मांग की है कि वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए तय 1.77 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी को बढ़ाकर दोगुना किया जाए।
  • तेल कंपनियों को आर्थिक मदद: पश्चिम एशिया संकट के बाद 78 दिनों तक पेट्रोल पंपों पर दाम स्थिर रखने के लिए सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को 1.23 लाख करोड़ रुपये की बड़ी सहायता राशि प्रदान की है।

एफडीआई और विनिवेश को लेकर सरकार का अगला प्लान क्या है?

अर्थव्यवस्था में नकदी और निवेश का प्रवाह तेजी से बनाए रखने के लिए सरकार की रणनीति बिल्कुल साफ है। 

  • सरकारी सूत्रों को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में सरकार अपने 80,000 करोड़ रुपये के निर्धारित विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन के लक्ष्य को आसानी से पार कर लेगी।
  • देश की अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के प्रवाह को बढ़ाने के लिए और भी नए कदम उठाए जाएंगे।
  • सूत्रों ने यह भी बताया है कि देश से पूंजी के बाहर जाने पर रोक लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

आगे के लिए क्या हैं संकेत?

वैश्विक संकट, महंगे फर्टिलाइजर और कच्चे तेल के भारी आयात बिल के कारण भारत पर वित्तीय दबाव जरूर है, लेकिन मजबूत घरेलू खपत के दम पर अर्थव्यवस्था सुरक्षित है। विदेशी निवेश और विनिवेश पर सरकार का सकारात्मक रुख यह दिखाता है कि भारत भविष्य की चुनौतियों से निपटने और अपनी विकास यात्रा को जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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