मोबाइल सेवाओं की गुणवत्ता जांचने के लिए टेलीकॉम नियामक ट्राई ने ‘ऑपरेटर-असिस्टेड’ ड्राइव टेस्ट शुरू किए हैं। ‘ऑपरेटर-असिस्टेड’ ड्राइव टेस्ट ट्राई के स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट से भिन्न हैं क्योंकि ये टेस्ट टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनियों के साथ मिलकर किए जाते हैं। यह टेस्ट रियल टाइम डाटा को ग्रहण करता है ताकि विभिन्न शहरों में कॉल ड्रॉप और आवाज की गुणवत्ता के स्तर पर नजर रखी जा सके।
ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा ने बताया कि ऑपरेटर-असिस्टेड ड्राइव टेस्ट ट्राई के सभी पांच क्षेत्रों में शुरू किए जा चुके हैं और इनके तहत कई शहर आते हैं। ये मथुरा (यूपी-पश्चिमी क्षेत्र), जैसलमेर (राजस्थान), उज्जैन (मध्य प्रदेश) और मंगलौर (कर्नाटक) सहित अन्य शहरों में शुरू हो चुके हैं। ट्राई के शिड्यूल के मुताबिक, कल्याण, नोएडा, जम्मू, गुवाहाटी-दिसपुर, मैसूर, हैदराबाद, राजकोट, भोपाल और झांसी समेत अन्य जगहों पर ये टेस्ट या तो हो रहे हैं या आने वाले सप्ताहों में किए जाने हैं। इन टेस्ट में टेलीकॉम कंपनियों के उपकरण और लागत शामिल है। पूरी प्रक्रिया की निगरानी ट्राई कर रहा है।
पिछले साल ट्राई ने अमृतसर में अगस्त-सितंबर में और दिल्ली, हैदराबाद, भोपाल, चंडीगढ़, मुंबई, लखनऊ, कानपुर, अहमदाबाद, रांची, दार्जिलिंग, सिक्किम और त्रिवेंद्रम में मई-जून में स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट किए थे। ड्राइव टेस्ट (स्वतंत्र या ऑपरेटर-असिस्टेड) में विभिन्न गुणवत्ता मानकों पर नेटवर्क के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है। इसमें कॉल सेट-अप सक्सेस रेट, कॉल ड्रॉप, ब्लॉक्ड कॉल्स और रेडियो फ्रीक्वेंसी कवरेज शामिल है। रिलायंस जियो और एयरटेल के बीच पॉइंट्स ऑफ इंटरकनेक्ट को लेकर चल रही कलह पर शर्मा ने कहा कि नियामक स्थिति पर निगरानी रखना जारी रखेगा।