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Policy Decision: सरकार ने मर्चेंट जहाजों के लिए सब्सिडी योजना को 2031 तक बढ़ाया, आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल

Thu, 07 May 2026 06:52 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

भारत सरकार ने आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत मर्चेंट जहाजों के लिए सब्सिडी योजना को वित्तीय वर्ष 2030-31 तक बढ़ा दिया है। सब्सिडी के नए नियम, शर्तें और समुद्री व्यापार पर इसका असर समझने के लिए इस खबर को विस्तार से पढ़ें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भारत को एक प्रमुख ग्लोबल शिपिंग हब बनाने और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने भारत में मर्चेंट जहाजों को पंजीकृत करने वाली कंपनियों को दी जाने वाली सब्सिडी योजना को अगले पांच वर्षों यानी वित्तीय वर्ष 2030-31 तक के लिए बढ़ा दिया है। यह निर्णय भारत की समुद्री फ्लीट को मजबूत करने और वैश्विक शिपिंग में भारत की उपस्थिति दर्ज कराने की एक रणनीतिक पहल है।

योजना की पृष्ठभूमि और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य

भारत की समुद्री व्यापार क्षमता को मजबूत करने के लिए यह योजना मूल रूप से 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत शुरू की गई थी। जुलाई 2021 में केंद्रीय कैबिनेट ने पांच वर्षों के लिए 1,624 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ इस योजना को मंजूरी दी थी। 

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इसकी आधिकारिक घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2021-22 के बजट भाषण के दौरान की थी। इसका मुख्य उद्देश्य मंत्रालयों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) द्वारा सरकारी माल के आयात के लिए जारी किए गए ग्लोबल टेंडर में हिस्सा लेने वाली भारतीय शिपिंग कंपनियों को आर्थिक सहायता (सब्सिडी) प्रदान करना है।

किसे मिलेगा फायदा? 

कंपनियों को मिलने वाली सब्सिडी को जहाजों की उम्र और पंजीकरण की तारीख के आधार पर बांटा गया है:

  • नई फ्लीट के लिए 15% सब्सिडी: 1 फरवरी 2021 के बाद भारत में पंजीकृत होने वाले वे जहाज जिनकी उम्र पंजीकरण के समय 10 वर्ष से कम है, वे 15 प्रतिशत सब्सिडी के हकदार होंगे। यह सब्सिडी सबसे कम बोली लगाने वाली विदेशी कंपनी (एल वन) की बोली का 15 प्रतिशत या 'राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल' (आरओएफआर) का उपयोग करने वाले भारतीय जहाज और एल वन विदेशी कंपनी की बोली के बीच का वास्तविक अंतर (जो भी कम हो) होगी।
  • मौजूदा जहाजों के लिए 10% सब्सिडी: 1 फरवरी 2021 तक 10 वर्ष से कम पुराने मौजूदा भारतीय-पंजीकृत जहाजों को 10 प्रतिशत की दर से सब्सिडी दी जाएगी। इसकी गणना भी L1 विदेशी बोलीदाता की बोली के 10 प्रतिशत या वास्तविक अंतर (जो भी कम हो) के आधार पर की जाएगी।
  • 20 साल से पुराने जहाजों को लाभ नहीं: इस योजना को आधुनिक और सुरक्षित जहाजों को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसलिए 20 साल से अधिक पुराने जहाज इस योजना के तहत किसी भी तरह की सब्सिडी के पात्र नहीं होंगे।

भविष्य का नजरिया

योजना के विस्तारित दायरे को देखते हुए जहाजरानी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में आवश्यकता पड़ी, तो व्यय विभाग से अतिरिक्त फंड आवंटित करने की मांग की जाएगी। मर्चेंट जहाजों के लिए इस सब्सिडी का विस्तार न केवल भारतीय शिपिंग कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा, बल्कि विदेशी जहाजों पर भारत की निर्भरता कम करके समुद्री व्यापार में एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करेगा।

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