साथ ही अगले सप्ताह कई आर्थिक आंकड़े भी जारी होने हैं। जैसे औद्योगिक उत्पादन और खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े। ये बृहस्पतिवार को जारी होंगे। वहीं थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े शुक्रवार को जारी होंगे।
इस संदर्भ में सैमको सिक्योरिटीज एंड स्टॉकनोट के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी जिमीत मोदी ने कहा कि, 'उतार-चढ़ाव और मौजूदा माहौल के कारण आशंका को देखते हुए निवेशक वित्तीय संकट (यस बैंक और कोरोनावायरस) को लेकर चीजें साफ होने तक बाजार से दूर रह सकते हैं और निवेश घटा सकते हैं।' उन्होंने कहा कि निवेश को लेकर रूचि कम होने और सक्रिय निवेशकों की गतिविधियां कम होने से बाजार नीचे रहने की संभावना है।
वहीं मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के खुदरा शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि, 'कोरोनावायरस और यस बैंक संकट और इसके वित्तीय प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे सप्ताह तीव्र गिरावट रही। आगामी सप्ताह बाजार में दबाव और उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विदेशी संस्थागत निवेशकों के पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव के कारण भी उठा-पटक बढ़ सकती है।'
पिछले सप्ताह 720.67 अंक टूटा सेंसेक्स
मालूम हो कि पिछले सप्ताह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 720.67 अंक यानी 1.88 फीसदी लुढ़का। यस बैंक पर नियामकीय पाबंदियों के कारण शुक्रवार को एक ही दिन में चौतरफा लिवाली के कारण सेंसेक्स 894 अंक टूटा। रिजर्व बैंक के यस बैंक पर पाबंदी के बाद बैंक का शेयर शुक्रवार को 55 फीसदी से अधिक नीचे आया। केंद्रीय बैंक ने एक महीने में प्रति खाते 50,000 रुपये की निकासी की सीमा लगाई है और उसके निदेशक मंडल को हटाकर दूसरे बोर्ड को नियुक्त किया है। इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ने रविवार को यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया।
शेयर खान बाय बीएनपी परिबा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रमुख (पूंजी बाजार रणनीति एवं निवेश) गौरव दुआ ने कहा कि, 'एक और बैंक संकट में फंसा है। इस बार निजी क्षेत्र का प्रमुख बैंक यस बैंक है। हालांकि आरबीआई ने कदम उठाया है, लेकिन पहले से कमजोर धारणा पर और असर पड़ा है।' उन्होंने कहा, 'भारतीय वित्तीय क्षेत्र में बार-बार समस्याएं सामने आने से विदेशी निवेशकों को गलत संदेश गया है। निकट भविष्य में एक नकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।'