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द बोनस मार्केट अपडेट: बड़ी गिरावट के बाद संभला बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी ने की दमदार शुरुआत

Fri, 09 Oct 2026 09:39 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

9 अक्तूबर 2026 को सेंसेक्स 404 अंक और निफ्टी 131 अंक से अधिक बढ़कर खुले। जानें शेयर बाजार की इस मजबूत शुरुआत का क्या है मतलब और निवेशकों पर इसका असर।
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सेंसेक्स ओपनिंग बेल - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने एक मजबूत शुरुआत की। सुबह 9:28 बजे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह शुरुआती तेजी निवेशकों के बीच सकारात्मक धारणा को दर्शाती है। सेंसेक्स, जो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक है, 71,997.37 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। इसमें 404.13 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई, जो 0.56 फीसदी का उछाल है। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी ने भी 22,363.55 पर कारोबार शुरू किया। इसमें 131.75 अंकों की बढ़त रही, जो 0.59 फीसदी की वृद्धि है।

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कल जिस शेयर बाजार में चौतरफा हाहाकार मचा था और निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए थे, उसी बाजार ने आज (9 अक्तूबर 2026) सुबह एक नया मोड़ ले लिया है।  दलाल स्ट्रीट पर आज सुबह से ही 'बुल्स' (तेजी लाने वाले) ने वापसी की कोशिश की है। पिछले सत्र में ऐतिहासिक गिरावट के साथ सेंसेक्स 32 महीने और निफ्टी 18 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था, जिसके बाद आज एक तकनीकी बाउंस-बैक देखने को मिल रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह हरियाली टिक पाएगी या वैश्विक दबाव इसे फिर से लाल निशान में धकेल देगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं।

आज सुबह बाजार में क्या हलचल रही?

कल की भयंकर गिरावट के बाद आज सुबह भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 338 अंक उछलकर 71,930 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी करीब 91 अंक चढ़कर 22,323 के पार निकल गया। बाजार में यह बढ़त मुख्य रूप से 'शॉर्ट कवरिंग' यानी कल की भारी बिकवाली के बाद कम कीमतों पर हुई खरीदारी की वजह से आई है। आसान शब्दों में कहें तो जब बाजार बहुत ज्यादा गिर जाता है, तो कुछ समय के लिए उसमें एक प्राकृतिक सुधार या रिकवरी आती है, आज भी ठीक वैसा ही हो रहा है।

बाजार में अचानक यह सुधार क्यों आया?

इस मामूली रिकवरी की सबसे बड़ी वजह यह है कि कल की गिरावट के बाद भारतीय बाजार 'ओवरसोल्ड जोन' यानी जरूरत से ज्यादा बिकवाली के दायरे में आ गए थे। जब शेयर बहुत ज्यादा सस्ते हो जाते हैं, तो घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) और ट्रेडर खरीदारी का मौका ढूंढने लगते हैं। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में कल के मुकाबले हल्की नरमी आने से भी घरेलू बाजार को थोड़ा सहारा मिला है।

वो कौन से बड़े विलेन हैं जो बाजार को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं?

बाजार भले ही आज हरे निशान में तैर रहा है, लेकिन इसका आगे का रास्ता कांटों भरा है। इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं:

  • कच्चा तेल और मिडिल ईस्ट का तनाव: वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड अभी भी 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का डर है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, इसलिए महंगा तेल हमारी अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए सबसे बड़ा विलेन है।
  • विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की अंधाधुंध बिकवाली: विदेशी फंड्स लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं। कल (गुरुवार) ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 12,944 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे, जो हाल के दिनों में एक दिन की सबसे बड़ी बिकवाली है।
  • आईटी सेक्टर पर दोहरा झटका: भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टीसीएस (टीसीएस) के तिमाही नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे हैं, जिससे इस सेक्टर में चिंता है। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा ग्रीन कार्ड से जुड़े एक प्रमुख लेबर प्रोग्राम को सस्पेंड करने की खबरों से इंफोसिस, विप्रो और टीसीएएस जैसी आईटी कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है।

आम निवेशकों को अब क्या रणनीति अपनानी चाहिए? बाजार के जानकारों का मानना है कि आज की यह तेजी एक 'तकनीकी उछाल' है, इसे एक स्थाई सुधार नहीं माना जा सकता। जब तक वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें शांत नहीं होतीं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं रुकती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। ऐसे में छोटे निवेशकों को जल्दबाजी में बड़ा पैसा लगाने से बचना चाहिए। अभी चुनिंदा और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही नजर रखना सबसे समझदारी भरा कदम होगा।

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