शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से बाजार प्रभावित हुए। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुझान और विदेशी पूंजी की निकासी ने भी निवेशकों की धारणा को नुकसान पहुंचाया।
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसिल्वन राधाकृष्णन ने बताया कि ब्रेंट कच्चा तेल मई के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका-ईरान संघर्ष मध्य पूर्व से तेल प्रवाह को बाधित कर रहा है। डब्लूटीआई कच्चा तेल पिछले सत्र में करीब 7.5 फीसदी बढ़ने के बाद 103-104 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा है। ब्रेंट कच्चा तेल 108 अमेरिकी डॉलर के निशान की ओर बढ़ा है। यह वृद्धि हूती बलों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के कारण हुई है।
राधाकृष्णन के अनुसार, भारत के लिए करीब 110 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल कच्चा तेल मुद्रास्फीति, रुपये, चालू खाता और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ाएगा। इससे मौद्रिक नीति में ढील की गुंजाइश भी कम हो जाएगी। एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि भारत के आयात बिल, मुद्रास्फीति और कंपनियों के मुनाफे को लेकर चिंताओं को बढ़ाएगी। यह जोखिम लेने की इच्छा को भी कम रखेगा। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए ऊंची कीमतें सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं।
राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि ऊंची तेल कीमतें मुद्रास्फीति और ब्याज दर परिदृश्य को लेकर चिंताओं को बढ़ा रही हैं। इसी कारण वैश्विक बाजार नीचे कारोबार कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक काफी नीचे कारोबार कर रहे थे। गुरुवार को अमेरिकी बाजार भी नकारात्मक दायरे में बंद हुए थे। इन कमजोर वैश्विक रुझानों ने भारतीय निवेशकों की धारणा को भी प्रभावित किया।