बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में ही उछल गए। सूचना प्रौद्योगिकी शेयरों, एचडीएफसी बैंक और नए विदेशी पूंजी प्रवाह ने बाजार को सहारा दिया।
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को खरीदार बने रहे। उन्होंने पिछले कारोबार में 755.33 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी थी। विदेशी पूंजी प्रवाह ने बाजार को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में रुचि दिखा रहे हैं। उनकी खरीदारी से बाजार में सकारात्मक माहौल बना।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल 4.29 फीसदी बढ़कर 87.70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7.85 फीसदी गिर गया। जापान का निक्केई 225 सूचकांक और शंघाई का एस एस ई कंपोजिट सूचकांक भी निचले स्तर पर कारोबार कर रहे थे। हालांकि, हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। मंगलवार को अमेरिकी बाजार अधिकतर बढ़त के साथ बंद हुए थे।
मंगलवार को सेंसेक्स 69.86 अंक या 0.09 फीसदी गिरकर 76,765.92 पर बंद हुआ था। निफ्टी 10.60 अंक या 0.04 फीसदी फिसलकर 23,985.35 पर समाप्त हुआ था। बुधवार की तेजी के बाद बाजार ने मंगलवार की गिरावट की भरपाई कर ली। यह उछाल निवेशकों के लिए राहत लेकर आया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक मजबूत वापसी का संकेत है।
डॉलर के मुकाबले बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया पांच पैसे बढ़कर 95.77 पर पहुंच गया। कमजोर अमेरिकी मुद्रा और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच लगातार चौथे दिन रुपया स्थिर बना रहा। विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय शेयरों की खरीदारी शुरू करने के बाद घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल से स्थानीय मुद्रा को भी समर्थन मिला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया 95.70 पर खुला और डॉलर के मुकाबले 95.77 पर फिसल गया, जो पिछले बंद भाव से 5 पैसे की बढ़त दर्शाता है। भारतीय मुद्रा मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे बढ़कर 95.82 पर बंद हुई, जबकि इससे पहले लगातार दो सत्रों में इसमें 74 पैसे की बढ़त दर्ज की गई थी।
बाजार में आईटी, बैंकिंग और एफएमसीजी शेयरों ने बढ़त का नेतृत्व किया। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में चार फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई, जिससे विमानन कंपनी इंडिगो के शेयरों में गिरावट आई। इंडिया वीआईएक्स में भी तीन फीसदी से अधिक की गिरावट देखी गई, जबकि व्यापक बाजार भी तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे।
बाजार में यह तेजी आईटी, बैंकिंग और एफएमसीजी जैसे प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में मजबूत खरीदारी के कारण आई। बीएसई का बाजार पूंजीकरण तीन लाख करोड़ रुपये बढ़कर 482 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इंडिया वीआईएक्स में 3 फीसदी से अधिक की गिरावट ने निवेशकों के बीच डर कम होने का संकेत दिया। व्यापक बाजार भी सकारात्मक रुख दिखा रहे थे, जिससे समग्र धारणा मजबूत हुई।
जून तिमाही के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 10 निफ्टी आईटी कंपनियों में से सात में अपनी हिस्सेदारी कम की थी। इसके बावजूद, जुलाई में आईटी क्षेत्र में तेजी से सुधार देखा गया। निफ्टी आईटी सूचकांक जुलाई में अब तक 16 फीसदी उछल चुका है। यह दर्शाता है कि निवेशकों की निराशा शायद अपने चरम पर पहुंच चुकी थी। कम मूल्यांकन, कम स्थिति और बेहतर तकनीकी संकेतक आईटी क्षेत्र में मजबूत सुधार का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।