घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को हरे निशान पर कारोाबर की शुरुआत हुई। सेंसेक्स 863.23 (1.14%) अंकों की मजबूती के साथ 76,278.58 के स्तर पर पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी 256.25 (1.08%) अंक उछलकर 23,975.55 के स्तर पर आ गया। शुरुआती कारोबार के दौरान बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में खरीदारी दिखी। जिसकी मदद से बेंचमार्क सूचकांक बढ़त हासिल करने में कामयाब हुए। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 25 पैसे बढ़कर 95.35 पर पहुंच गया।
सोमवार के शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई (बीएसई) सेंसेक्स 908.98 अंकों की शानदार बढ़त के साथ 76,317.85 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 262.65 अंक उछलकर 23,977.70 पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले, शुक्रवार को भी सेंसेक्स 231.99 अंक (0.31%) और निफ्टी 64.60 अंक (0.27%) की बढ़त के साथ बंद हुए थे। हालांकि, एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 4,440.47 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची थी।
बाजार में इस उछाल का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में आई 5.58 प्रतिशत की भारी गिरावट है, जिससे यह लुढ़ककर 97.76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। हाल के दिनों में तेल की कीमतें 100-105 डॉलर के जोन से ऊपर चल रही थीं, जहां से अब यह काफी नीचे आ चुका है।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार, तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के व्यापक आर्थिक परिदृश्य (मैक्रो-इकोनॉमिक आउटलुक) के लिए बेहद सकारात्मक है। कच्चे तेल के दाम कम होने से महंगाई की चिंताएं कम होती हैं, आयात लागत घटती है और कॉर्पोरेट मुनाफे में सुधार होता है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का मानना है कि अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की उम्मीद से कच्चे तेल में 5 डॉलर की गिरावट आई है और यह 100 डॉलर से नीचे आ गया है। उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से कई बार ऐसी उम्मीदें झूठी साबित हुई हैं, इसलिए बाजार अभी स्पष्टता का इंतजार करेगा। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि "अगर यह संभावित समझौता कायम रहता है और कच्चा तेल नीचे गिरता है, तो यह बाजार के लिए एक टर्निंग पॉइंट (निर्णायक मोड़) साबित हो सकता है"। कुल मिलाकर, कच्चे तेल का नरम होना भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है, लेकिन आगे की चाल पूरी तरह से वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्यों पर निर्भर करेगी।