घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार की गिरावट के बाद बुधवार को भी सुस्ती दिख रही है। प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे रहे हैं। सुबह 9 बजकर 29 मिनट पर सेंसेक्स 204.34 (0.25) अंकों की गिरावट के साथ 81,347.29 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। दूसरी ओर, निफ्टी 46.05 (0.19%) अंक टूटकर 24,780.15 के स्तर पर पहुंच गया।
आईटीसी में हिस्सेदारी बिक्री की खबरों के बीच बुधवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स की कंपनियों में आईटीसी, इंडसइंड बैंक, नेस्ले, टाइटन, कोटक महिंद्रा बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज और मारुति पिछड़ गईं।
आईटीसी में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। ऐसी खबरें हैं कि आईटीसी लिमिटेड में सबसे बड़े शेयरधारक ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको (बीएटी) ब्लॉक डील रूट के जरिए अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहा है और इस बार अपनी 2.3 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का इरादा रखता है। लाभ पाने वाले में इंफोसिस, इटरनल, टाटा मोटर्स, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर रहे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, "आईटीसी में 2.3 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के बीएटी के फैसले से शेयर में नरमी बनी रहेगी।" एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक और शंघाई का एसएसई कम्पोजिट सूचकांक सकारात्मक क्षेत्र में कारोबार कर रहे थे, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट पर था। मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में तेजी देखने को मिली। नैस्डैक कंपोजिट में 2.47 प्रतिशत, एसएंडपी 500 में 2.05 प्रतिशत और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 1.78 प्रतिशत की तेजी आई। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 348.45 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.37 प्रतिशत बढ़कर 64.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 624.82 अंक या 0.76 प्रतिशत गिरकर 81,551.63 पर बंद हुआ था। निफ्टी 174.95 अंक या 0.70 प्रतिशत गिरकर 24,826.20 पर बंद हुआ था।
अमेरिकी मुद्रा के मजबूत होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के रुख के कारण बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 23 पैसे गिरकर 85.63 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया।विदेशी मुद्रा विश्लेषकों ने कहा कि महीने के अंत में निर्यातकों और बैंकों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ने के कारण स्थानीय मुद्रा दबाव में रही। हालांकि घरेलू शेयर बाजारों में मिश्रित धारणा के बीच विदेशी निधि प्रवाह धीमा रहा।